पालिका का एक्शन : डिवाइडर से हटे अवैध यूनीपोल, 28 पर चला बुलडोजर
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Sep 19, 2026
बिना अनुमति लगाए गए थे विज्ञापन बोर्ड, पालिका की कार्रवाई के बाद मचा हड़कंप
उन्नाव। जिला अस्पताल रोड पर डिवाइडर के बीच लगाए गए अवैध यूनीपोल को हटाने के लिए नगर पालिका ने शुक्रवार को अभियान चलाया। टीम ने बुलडोजर की मदद से 28 मिनी यूनीपोल गिरा दिए। कार्रवाई शुरू होते ही सड़क किनारे विज्ञापन लगाने वाले कारोबारियों में हड़कंप मच गया। पालिका अधिकारियों ने साफ किया कि बिना अनुमति और निर्धारित शुल्क दिए सार्वजनिक जगह पर विज्ञापन लगाना अब नहीं चलेगा। जिला अस्पताल से गदनखेड़ा चौराहे की ओर जाने वाली सड़क के डिवाइडर पर लंबे समय से विज्ञापन बोर्ड लगे थे। पालिका की जांच में सामने आया कि कई यूनीपोल बिना अनुमति लगाए गए थे। इनमें 31 मिनी यूनीपोल और 13 बड़े यूनीपोल शामिल बताए गए। इनसे पालिका को विज्ञापन शुल्क के रूप में राजस्व भी नहीं मिल रहा था।

"द लखनऊ टाइम्स" ने उठाया मुद्दा, कार्रवाई शुरू
इस मामले को "द लखनऊ टाइम्स" ने 18 सितंबर के अंक में प्रमुखता से उठाया था। खबर में जिला अस्पताल से गदनखेड़ा चौराहे तक डिवाइडर में लगाए गए विज्ञापन पोल, उनकी अनुमति और पालिका को मिलने वाले शुल्क को लेकर सवाल उठाए गए थे। नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही थी। खबर प्रकाशित होते इसके अगले कुछ ही घंटो के बाद ही पालिका की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई से साफ संदेश गया कि सार्वजनिक संपत्ति पर बिना अनुमति लगाए गए विज्ञापन पोल को लेकर पालिका अब सख्ती बरतेगी।
रात में खोदकर खड़े कर दिए पोल
डिवाइडर और फुटपाथ का निर्माण आवास विकास परिषद ने कराया था। करीब 60 लाख रुपये की लागत से तैयार कराए गए इस हिस्से में लोगों के आवागमन के लिए फुटपाथ के साथ डिवाइडर बनाए गए थे। बाद में डिवाइडर के बीच स्ट्रीट लाइट और पौधे भी लगाए गए। आरोप है कि निगरानी कमजोर होने का फायदा उठाकर विज्ञापन कारोबारियों ने डिवाइडर की जगह-जगह खुदाई कर पोल खड़े कर दिए। इससे डिवाइडर और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
स्ट्रीट लाइट और पौधों के बीच लगाए बोर्ड
इस मार्ग पर करीब 54 लाख रुपये की लागत से स्ट्रीट लाइट भी लगाई गई हैं। डिवाइडर पर पौधे लगाए जाने के बाद इसे सड़क की सुंदरता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया था। लेकिन जगह-जगह लगाए गए बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड से डिवाइडर का स्वरूप बदल गया। कुछ स्थानों पर तीन तरफ विज्ञापन दिखाने वाले पोल लगाए गए थे।
नवंबर 2025 में कराया गया था सर्वे
बता दें कि नगर पालिका के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में यूनीपोल को लेकर नवंबर 2025 में सर्वे कराया गया था। इसमें कुल 145 यूनीपोल नगर पालिका में दर्ज किए गए थे। ऐसे में अब जिला अस्पताल रोड पर लगे पोलों की स्थिति को लेकर भी रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया जा रहा है। यह देखा जा रहा है कि कौन से यूनीपोल पालिका के रिकॉर्ड में दर्ज हैं और किन्हें बिना अनुमति लगाया गया है।
पालिका को शुल्क मिल रहा था या नहीं, जांच में साफ होगा
अवैध यूनीपोल को लेकर सबसे बड़ा सवाल पालिका के राजस्व से जुड़ा है। जिन स्थानों पर विज्ञापन लगाए गए, उनके लिए संबंधित कारोबारी ने अनुमति ली थी या नहीं और निर्धारित शुल्क जमा किया गया था या नहीं, यह जांच का अहम हिस्सा है।नगर पालिका अब मौके पर लगे पोल और अपने रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जिन पोलों के संबंध में अनुमति या शुल्क जमा होने का रिकॉर्ड नहीं मिलेगा, उन्हें हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
पहले नोटिस, अब सीधे कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद नगर पालिका ने विज्ञापन कारोबारियों को अवैध यूनीपोल स्वयं हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सभी पोल नहीं हटाए गए। शुक्रवार को पालिका की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। बुलडोजर से 28 मिनी यूनीपोल हटा दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक बाकी अवैध पोल भी हटाए जाएंगे। ईओ राम आसरे कमल ने बताया कि सभी विज्ञापन और होर्डिंग कारोबारियों को अपने स्तर से अवैध यूनीपोल हटाने की सख्त हिदायत दी गई है। निर्धारित समय में पोल नहीं हटाए गए तो नगर पालिका उन्हें हटाने की कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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