प्लांट में घंटों खड़े रहते हैं ट्रक : चालकों ने उठाए व्यवस्था पर सवाल
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Sep 23, 2026
दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में चालकों का विरोध, बोले- लोडिंग के बाद भी नहीं निकलने दिया जाता बाहर
उन्नाव। दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के बॉटलिंग प्लांट में बुधवार को ट्रक चालकों के विरोध के चलते व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए। चालकों का कहना है कि लोडिंग के लिए प्लांट पहुंचने के बाद उन्हें कई घंटे परिसर में ही रोक दिया जाता है। इससे न सिर्फ उन्हें परेशानी होती है, बल्कि ट्रकों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। चालकों ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर विरोध जताया। यह प्लांट जिले के साथ आसपास के कई जिलों की गैस सप्लाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां से लखनऊ, हरदोई, फतेहपुर, कानपुर, कानपुर देहात समेत 30 से ज्यादा जिलों की गैस एजेंसियों तक घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर भेजे जाते हैं। चालकों के मुताबिक रोज बड़ी संख्या में ट्रक यहां से सिलेंडर लेकर अलग-अलग जिलों के लिए रवाना होते हैं। ऐसे में प्लांट के अंदर ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
सुबह पहुंचने के बाद शाम तक परिसर में रहने का आरोप
विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि वे सुबह करीब छह बजे ट्रक लेकर प्लांट पहुंचते हैं। लोडिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई बार उन्हें तत्काल बाहर नहीं निकलने दिया जाता। आरोप है कि गेट बंद कर दिए जाने के कारण चालक चाय-पानी या भोजन जैसी जरूरतों के लिए भी बाहर नहीं जा पाते। चालकों का कहना है कि कई बार शाम तक परिसर में ही रहना पड़ता है। धरने में शामिल चालक सुहरलाल ने बताया कि उनकी मुख्य मांग यही है कि लोडिंग पूरी होने के बाद ट्रकों को पहले की तरह बाहर जाने दिया जाए। उनका कहना है कि चालक कई घंटे वाहन में रहते हैं और इस दौरान उन्हें जरूरी कामों के लिए भी परेशानी होती है।
एजेंसी में पहले से सिलेंडर, फिर भेजे गए कई ट्रक
चालकों ने गैस एजेंसियों तक ट्रकों के भेजे जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि मंगलवार को लखनऊ की एक गैस एजेंसी के लिए लगातार नौ ट्रक भेजे गए। वहां पहुंचने के बाद चालकों को जानकारी हुई कि एजेंसी में पहले से करीब एक हजार सिलेंडर मौजूद थे और खाली सिलेंडरों की भी उपलब्धता नहीं थी। चालकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में ट्रक लेकर लंबी दूरी तय करने के बाद उन्हें बेवजह इंतजार करना पड़ता है। इससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। उनका कहना है कि एजेंसियों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से ट्रकों को भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए।
सड़क पर ट्रक खड़ा करें तो चालान, प्लांट में पार्किंग नहीं
चालकों ने प्लांट के बाहर ट्रकों की पार्किंग को लेकर भी समस्या बताई। उनका कहना है कि प्लांट के अंदर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से कई बार वाहनों को सड़क किनारे खड़ा करना पड़ता है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने पर आरटीओ या प्रशासन की कार्रवाई और चालान का डर बना रहता है। चालकों का कहना है कि यदि प्लांट में वाहनों के लिए पर्याप्त जगह निर्धारित कर दी जाए तो उन्हें सड़क पर ट्रक खड़ा करने की मजबूरी नहीं रहेगी। इससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी।
अधिकारियों के व्यवहार पर भी नाराजगी
विरोध कर रहे चालकों ने प्लांट के कुछ अधिकारियों के व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि समस्याएं बताने पर कई बार उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ सख्त या बदतमीजी से बात की जाती है। चालकों का कहना है कि वे लंबे समय से इन समस्याओं को उठा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। चालकों के मुताबिक बुधवार को मौके पर करीब 250 से 300 चालक मौजूद रहे और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
अधिकारियों ने कहा, प्लांट में काम सामान्य
उधर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्लांट अधिकारियों ने चालकों की हड़ताल की बात से इनकार किया। अधिकारियों का कहना है कि प्लांट की गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं। कुछ चालकों की ओर से अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने की बात भी अधिकारियों ने कही। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच प्लांट से सिलेंडरों की आपूर्ति पर कितना वास्तविक असर पड़ा है, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हालांकि, बड़ी संख्या में ट्रकों की आवाजाही वाले इस प्लांट में चालकों की ओर से उठाए गए पार्किंग, प्रवेश-निकास और एजेंसियों तक लोड भेजने से जुड़े सवालों ने व्यवस्था पर जरूर चर्चा शुरू कर दी है।
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