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: यूपी के रामपुर के एक अज़ीम इलमी और सामाजिक हस्ती से महरूम हो गए!

THE LUCKNOW TIMES

Thu, Aug 28, 2025
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यूपी के रामपुर के एक अज़ीम इलमी और सामाजिक हस्ती से महरूम हो गए!

 

रिपोर्ट:- आसिम अज़ीज़ 

  उत्तर प्रदेश रामपुर : दरअसल आज सुबह अमेरिका के डेलास शहर से डॉ. ज़फ़र अली अंजुम वजीही का फोन आया कि शहर मुफ्ती हज़रत मौलाना महबूब अली साहब क़ादरी वजीही का इंतेकाल हो गया है। इना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन। मुफ्ती साहब का जन्म जून 1930 को मोहल्ला अंगूरी बाग में हाफ़िज़ अमजद अली साहब के घर हुआ था। उन्होंने मदरसा अनवारुल उलूम में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और कुराने करीम हिफ़्ज़ किया। 1948 से 1954 तक खतीब-ए-आजम मौलाना शाह वजीहुद्दीन अहमद खान कादरी मुजद्दी के मार्गदर्शन में अरबी की शिक्षा पूरी की। 1954 में ही मदरसा जामे उल उलूम फ़ुरकानिया में शिक्षक बने और तरक्की करते हुए प्रिंसिपल के पद तक पहुंचे। 1998 में मदरसा बोर्ड की नौकरी से सेवानिवृत्त हुए लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षण सेवाएं देते रहे। 1959 में खतीब-ए-आजम ने उन्हें जामा मस्जिद का इमाम नियुक्त किया और 1960 में मुफ्तीए शहर और मुफ्ती फ़ुरकानिया कें पदों पर नियुक्त किया। पैंसठ साल तक लगातार शिक्षण और फतवा जारी करने की सेवाएं देते रहे। इल्म-ए-हदीस की मशहूर किताब मिश्कात शरीफ की उर्दू व्याख्या आठ खंडों में लिखी जो मदरसा फ़ुरकानिया से छपी है। मुफती साहब मरहूम के शिष्यों की संख्या सैकड़ों तक पहुंचती है जो भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए हैं | मरहूम मुफ्ती साहब ने रामपुर के मसलके एतेदाल को हमेशा तरजीह दी और मज़हबी शिद्दत पसंदो को हमेशा राहे एतेदाल (दरमियाना रास्ता) पर चलने की तलकीन फरमाई। रामपुर के मदरसा जामें उल उलूम फुरकानिया और खानकाहे अहमदिया कादरिया की इंतेज़ामी कमेटियों के वो ता हयात सदर और मुतवल्ली रहे। जामा मस्जिद की खिताबत के फराईज़ भी माज़ी करीब तक अंजाम देते रहे।   गुज़िश्ता 5 अगस्त को मरहूम ने रामपुर से अमेरिका का सफर इख्तियार किया, वहां पर वो अपने पोते हाफिज़ व कारी सबीह अंजुम की शादी की तकरीब में शरीक हुए लेकिन चंद रोज़ के बाद ही उन्हें दिमागी सदमा (Brain Stroke) हुआ फौरी ऑपरेशन किया गया लेकिन होश नहीं आ सका और उनका चन्द रोज़ के बाद इन्तेकाल होगया।   जुमा की सुबह तक उनकी मैयत रामपुर पहुँचने का इम्कान है उसके बाद ही नमाज़ जनाज़ा और तदफीन का इंतेज़ाम होगा। परिजनों में, पत्नी के अलावा तीन बेटे हैं: (1) मसूद अली साहब (2) डॉक्टर जफर अली अंजुम उर्फ सऊद साहब (3) मुंशी फैज अली इरफान साहब, इनके अलावा, तीन बेटियां भी यादगार हैं|   बुधवार को शहर भर में कुरान ख्वानी का सिलसिला जारी रहा. दोपहर बारह बजे मदरसा फुरकानिया में सैकड़ों छात्रों और शिक्षकों ने कुरान ख्वानी फरमाई 'कुल शरीफ' होवा और शहर इमाम मौलवी मोहम्मद नासिर खान साहब ने मरहूम की मग़फिरत दुआ फरमाई|

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