सालों की समस्या, कुछ घंटों में ‘ठीक’—लोगों को नहीं हो रहा भरोसा
उन्नाव। नगर विकास मंत्रालय के विशेष सचिव उदयभान त्रिपाठी का शुक्रवार को हुआ दौरा अब नगरपालिका की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। हाकिम टोला स्थित नगर पालिका परिसर में पीपी मॉडल के तहत बनी मार्केट का उन्होंने निरीक्षण किया, लेकिन पूरे दौरे की तेजी ने कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जमीनी हकीकत जानने की मंशा होती, तो निरीक्षण इतने कम समय में पूरा नहीं किया जाता। कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर का जायजा लेने से यह संकेत मिलता है कि या तो पहले से ही सब कुछ ठीक दिखाने की तैयारी कर ली गई थी या फिर वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया गया।
दुकानें बनीं, आय नहीं—पालिका को नुकसान
हाकिम टोला स्थित नगर पालिका मार्केट में करीब पांच साल पहले पीपी मॉडल के तहत 150 दुकानों का निर्माण कराया गया था, लेकिन अब तक उनका आवंटन नहीं हो सका है। इसका सीधा असर नगरपालिका की आय पर पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा मनमानें तरीके से दुकानों की दरें सरकारी मानकों से अधिक तय कर दी गईं, जिससे व्यापारी आगे नहीं आए और दुकानें खाली पड़ी रहीं। नतीजतन, पालिका को किराए से मिलने वाली आय अब तक शुरू ही नहीं हो पाई है। इसी परिसर के धवन रोड की ओर बने दोनों प्रवेश द्वारों पर लंबे समय से अतिक्रमण बना हुआ था। वहीं, नगरपालिका रोड की ओर मुख्य मार्ग पर डंपिंग जोन के कारण गंदगी का अंबार लगा रहता है, जिससे लोगों और व्यापारियों को लगातार परेशानी होती रही है।
निरीक्षण से पहले सफाई, बाद में फिर वही हाल?
निरीक्षण से ठीक पहले परिसर की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आई। जहां वर्षों से कूड़े का ढेर और बदबू रहती थी, वहां अचानक साफ-सफाई दिखने लगी। धवन रोड के दोनों प्रवेश द्वारों से अतिक्रमण हटाया गया और इलाके में चल रही चिकन व मटन की दुकानों को भी अस्थायी रूप से बंद करा दिया गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई स्थायी नहीं, बल्कि दौरे को बेहतर दिखाने की कोशिश भर थी। आम दिनों में हालात पूरी तरह अलग रहते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि जब व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो उसे नियमित रूप से क्यों नहीं बनाए रखा जाता।
सालों से शिकायतें, कार्रवाई नहीं
हाकिम टोला और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने कई बार सफाई, कूड़ा निस्तारण और अतिक्रमण को लेकर शिकायतें कीं, इसके अलावा क्षेत्रीय सभासद द्वारा बोर्ड मीटिंग मे भी डंपिंग ज़ोन हटवाने के लिए लिखित और मौखिक मुद्दा उठाया लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। मामले फाइलों में दबकर रह गए और समस्याएं लगातार बढ़ती रहीं। अब जब उच्च अधिकारी का दौरा हुआ, तो अचानक से व्यवस्था दुरुस्त दिखने लगी। इससे लोगों के बीच नाराजगी भी है और सवाल भी कि आखिर अब तक जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे।
औपचारिकता बनकर रह गया निरीक्षण?
दौरे के तरीके को लेकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज औपचारिकता था। अगर वास्तविक सुधार की मंशा होती, तो मौके पर रुककर स्थानीय लोगों से बातचीत की जाती, समस्याओं की गहराई से जांच होती और जिम्मेदारी तय की जाती। लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आया। इससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि निरीक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गया।
अब कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेंगे सवाल
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस निरीक्षण के बाद कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस बार भी जिम्मेदारी तय नहीं हुई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि समस्याएं कितनी भी गंभीर हों, उनका समाधान नहीं होगा। वहीं, अगर निष्पक्ष जांच होती है तो सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण और अव्यवस्था के लिए जिम्मेदारों की भूमिका सामने आ सकती है। नगरपालिका प्रशासन ने इस मामले में आगे की प्रक्रिया के लिए शासन से अनुमति मांगी थी। इसी क्रम में विशेष सचिव ने मौके का निरीक्षण किया है और अब अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। नगरपालिका के ईओ संजय कुमार गौतम ने बताया कि दुकानों का आवंटन अभी तक नहीं हो सका है, जिसके चलते पालिका को किराए से होने वाली आय नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि आवंटन प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।