16 करोड़ का पुल 16 दिन भी नहीं चला : भाजपा सरकार पर बरसे प्रीतम सिंह
Tue, Jul 28, 2026
टोंस नदी पुल के अप्रोच रोड धंसने पर कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के लगाए आरोप
प्रीतम सिंह बोले, जनता के टैक्स के पैसे से हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल
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देहरादून। प्रेमनगर के नंदा की चौकी स्थित टोंस नदी पर बने पुनर्निर्मित पुल का अप्रोच रोड धंसने के बाद उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। करीब 16 करोड़ की लागत से तैयार इस पुल को हाल ही में आम लोगों के लिए खोला गया था, लेकिन पहली बड़ी बारिश के बाद ही अप्रोच रोड का हिस्सा धंस गया। घटना के बाद कांग्रेस ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक पुल का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल है। उनका कहना है कि जिस पुल पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वह कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो गया। इससे साफ है कि कहीं न कहीं निर्माण प्रक्रिया या गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर चूक हुई है। प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण पर करीब 16 करोड़ खर्च किए गए थे। मरम्मत पूरी होने के बाद 12 जुलाई को पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया, लेकिन महज 16 दिन बाद ही अप्रोच रोड धंस गया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी लागत के बावजूद निर्माण का इतनी जल्दी खराब होना आम लोगों के पैसे की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर उनकी गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि सरकारी विभागों में कथित कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के कारण निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार नहीं हो रहे हैं, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब भी किसी सरकारी परियोजना में खामियां सामने आती हैं, तब जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होती। यही वजह है कि लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती और ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि निर्माण कार्य की निगरानी किस अधिकारी ने की, गुणवत्ता परीक्षण किस स्तर पर हुआ और आखिर ऐसी क्या वजह रही कि करोड़ों रुपये की परियोजना पहली ही बारिश में जवाब दे गई। प्रीतम सिंह ने कहा कि जनता अपने टैक्स के पैसे से बनने वाले हर सरकारी निर्माण का हिसाब चाहती है। सरकार को यह बताना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार कौन है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। उनके अनुसार विकास कार्य तभी सार्थक माने जाएंगे, जब उनमें पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही तीनों सुनिश्चित हों।
बारिश में खुली निर्माण की परीक्षा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन अप्रोच रोड धंसने के बाद एक बार फिर सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी जांच नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा भी हो सकता है।
अब सबकी नजर सरकार की कार्रवाई पर
पुल के धंसने की घटना के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है, जबकि आम लोग भी यह जानना चाहते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य इतनी जल्दी कैसे प्रभावित हो गया। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करती है या यह मामला भी अन्य निर्माण विवादों की तरह फाइलों तक सीमित रह जाता है।
लोकनगर की सड़क पर फिर अटका काम : विधायक के पत्र के बाद एनओसी पर छिड़ी नई बहस
Tue, Jul 14, 2026
प्रदर्शन के बाद डीएम को लिखा पत्र, पालिकाध्यक्ष बोली, 2 जुलाई को ही दे चुके हैं अनापत्ति प्रमाणपत्र
जिम्मेदारी को लेकर विभागों के अलग-अलग दावे
उन्नाव। लोकनगर से कब्बाखेड़ा को जोड़ने वाली करीब 200 मीटर लंबी जर्जर सड़क का निर्माण एक बार फिर विभागीय उलझन में फंसता नजर आ रहा है। शनिवार को स्थानीय लोगों के प्रदर्शन और सदर विधायक पंकज गुप्ता के मौके पर पहुंचकर जल्द काम शुरू कराने के आश्वासन के बाद अब मामला प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है। विधायक ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर नगर पालिका से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी कराने की मांग की है, ताकि सड़क का निर्माण किसी अन्य विभाग या उपलब्ध मद से कराया जा सके। हालांकि नगर पालिका ने दावा किया है कि वह एनओसी पहले ही जारी कर चुकी है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब एनओसी उपलब्ध है तो निर्माण कार्य अब तक शुरू क्यों नहीं हो सका। लोकनगर की यह सड़क पिछले लंबे समय से बदहाल पड़ी है। बरसात में सड़क पर जलभराव होने से गहरे गड्ढे नजर नहीं आते और आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग आसपास के कई मोहल्लों को जोड़ता है और प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन इसी रास्ते से होता है। सड़क की खराब स्थिति के कारण राहगीरों के साथ स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सड़क निर्माण में लगातार हो रही देरी से नाराज लोगों का धैर्य शनिवार को जवाब दे गया। वार्ड सभासद पंकज लोधी के नेतृत्व में 50 से अधिक लोगों ने सड़क पर भरे पानी के बीच बैठकर प्रदर्शन किया। करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी जताई। सूचना पर सदर विधायक पंकज गुप्ता मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया कि सोमवार या मंगलवार से सड़क निर्माण शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। विधायक के आश्वासन के बाद लोगों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इसके बाद विधायक ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में बताया कि सड़क की स्थिति अत्यंत खराब है और इसका निर्माण जनहित में जल्द कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि नगर पालिका की योजना से कार्य संभव नहीं हो पा रहा है तो एनओसी जारी कर अन्य योजना या उपलब्ध बजट से सड़क बनवाई जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। हालांकि नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता भानू मिश्रा ने विधायक के पत्र के बाद अलग दावा किया। उन्होंने कहा कि नगर पालिका की ओर से 2 जुलाई को ही अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया जा चुका है। सड़क का निर्माण किसी भी सक्षम विभाग या उपलब्ध मद से कराया जा सकता है। ऐसे में अब निर्माण कार्य शुरू कराने में एनओसी कोई बाधा नहीं है। इस पूरे मामले में पहले भी विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर भ्रम की स्थिति सामने आ चुकी है। नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रवीण मिश्रा 'भानू' ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सड़क को लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी बताया था और कहा था कि पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से क्षेत्र के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके जवाब में लोक निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया कि रायबरेली-बिलग्राम मार्ग से जुड़े पुराने सफीपुर मार्ग का 1.80 किलोमीटर तक चौड़ीकरण फरवरी 2026 में कराया जा चुका है, लेकिन उसके आगे का हिस्सा विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। विभाग ने यह भी कहा कि जिस 200 मीटर सड़क की बात हो रही है, वह उसकी सीमा से बाहर है। अब जबकि विधायक की ओर से जिलाधिकारी को पत्र भेजा जा चुका है और नगर पालिका भी एनओसी जारी होने का दावा कर रही है, ऐसे में लोगों की नजर जिला प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी है। सभासद ओंमेंद्र पंकज लोधी और क्षेत्रवासियों का कहना है कि विभागीय पत्राचार और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अब काफी लंबी हो चुकी है। बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति लगातार बिगड़ रही है, इसलिए प्रशासन को तत्काल समन्वय बनाकर निर्माण कार्य शुरू कराना चाहिए, ताकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
जल निकासी बाधित : पीपरखेड़ा के ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार
Mon, Jun 15, 2026
पुराने निकासी मार्ग बंद होने का आरोप, 8 फुट चौड़ा रास्ता और नाली निर्माण की मांग
उन्नाव। सदर तहसील क्षेत्र के पीपरखेड़ा गांव में जल निकासी और रास्ते की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। सोमवार को ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हुए समस्या के समाधान की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में वर्षों से मौजूद पानी निकासी का मार्ग बंद कर दिए जाने से घरों और रास्तों पर जलभराव की स्थिति पैदा हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले गांव और आसपास के खेतों का पानी एक पुराने निकासी मार्ग से तालाब की ओर निकल जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में उस रास्ते के अवरुद्ध हो जाने से जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो गई है। इससे बारिश के दौरान कई घरों के सामने पानी जमा हो जाता है और लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण रज्जन पाल ने बताया कि तालाब की ओर जाने वाले पानी के निकास को बंद किए जाने के बाद समस्या लगातार बढ़ती गई। उनका कहना है कि निकासी मार्ग बाधित होने से खेतों और आबादी वाले हिस्सों में पानी भरने लगा है, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीण महिलाओं ने भी समस्या को गंभीर बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। सुताना ने बताया कि गांव में नाली और करीब आठ फुट चौड़े खड़ंजा मार्ग की जरूरत है। उनका आरोप है कि विभिन्न स्थानों पर बांध जैसी रुकावटें बना दी गई हैं, जिससे पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया है और घरों के सामने जलभराव होने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले स्थानीय स्तर पर भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और जल निकासी की व्यवस्था बहाल कराने, नाली निर्माण तथा रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बरसात के मौसम में हालात और गंभीर हो सकते हैं। उनका कहना है कि जलभराव से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।