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तांबेश्वर परिसर में गूंजे 'जय श्रीराम' के जयकारे : रावण वध के साथ रामकथा का भव्य समापन

THE LUCKNOW TIMES

Tue, Feb 10, 2026
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उत्तर प्रदेश फतेहपुर। शहर के ऐतिहासिक तांबेश्वर परिसर में संवेदना सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा वातावरण 'राममय' हो गया। कथा के नौवें दिन पूज्य महाराज जी ने जैसे ही रावण वध और प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन का प्रसंग सुनाया, पांडाल में मौजूद हजारों भक्तों ने गगनभेदी जयकारे लगाए।

DM और SP ने लिया महाराज जी का आशीर्वाद

इस पावन अवसर पर जनपद के जिलाधिकारी रवींद्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक अनूप सिंह ने कथा स्थल पहुंचकर महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं और सेवा भाव की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। शाम को आयोजित महाआरती में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था, जहाँ दीपों की लौ और श्रद्धा के स्वरों ने अलौकिक दृश्य उपस्थित कर दिया।

कथा प्रसंग: शबरी की प्रतीक्षा से लेकर राजतिलक तक का सफर

कथा के नौवें दिन महाराज जी ने अरण्यकांड से प्रसंग की शुरुआत की। उन्होंने विस्तार से प्रभु की लीलाओं का वर्णन किया:

अत्रि-अनुसुइया मिलन: माता अनुसुइया द्वारा माता सीता को स्त्री धर्म का उपदेश देना और ऋषियों की रक्षा हेतु प्रभु द्वारा 'निसिचर हीन करउँ महि' की प्रतिज्ञा लेना।

शबरी और नवधा भक्ति: महाराज जी ने शबरी को धैर्य और प्रतीक्षा की साक्षात प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि भगवान केवल प्रेम के भूखे हैं, इसीलिए उन्होंने शबरी के जूठे बेर खाकर संसार को नवधा भक्ति का संदेश दिया।

हनुमान मिलन और सेतु निर्माण: हनुमान जी के माध्यम से सुग्रीव से मित्रता, माता सीता की खोज और नल-नील के सहयोग से समुद्र पर सेतु निर्माण के प्रसंग ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रावण वध और राज्याभिषेक: लंका के भीषण युद्ध के बाद रावण का उद्धार और विभीषण को राजपद सौंपने की कथा सुनाई गई। अंत में, जब प्रभु पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे, तो राजतिलक के भजनों पर भक्त झूम उठे। वशिष्ठ जी द्वारा प्रभु का तिलक और पूरी अयोध्या का दीपों से जगमगाना, साक्षात त्रेतायुग की अनुभूति करा गया।

विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति

कथा के विश्राम दिवस पर कई गणमान्य व्यक्तियों ने महाराज जी का पूजन कर स्मृति चिन्ह भेंट किए।

पूर्व विधायक विक्रम सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल, अपर्णा सिंह, अनुराग मिश्रा और राहुल सिंह ने महाराज जी को सम्मानित किया।

मुख्य यजमान रुक्मणी गुप्ता एवं अनूप अग्रवाल ने व्यास पीठ का पूजन किया।

कार्यक्रम के सफल संयोजन में स्वरूपराज सिंह जूली ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया।

"रामकथा केवल कहानी नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। रावण का वध अहंकार के अंत का प्रतीक है।" - पूज्य महाराज जी

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