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अस्पतालों की हकीकत पर डीएम सख्त : गर्भवती को निजी अस्पताल ले गईं तो आशा पर होगी कार्रवाई

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Thu, Aug 27, 2026
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संस्थागत प्रसव की धीमी रफ्तार पर जताई नाराजगी, गर्भवती की पूरे नौ माह निगरानी के निर्देश

उन्नाव। गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में प्रसव के लिए लाने की जिम्मेदारी संभाल रहीं आशा बहुओं और आशा संगिनियों पर अब प्रशासन की सीधी नजर रहेगी। यदि कोई आशा गर्भवती महिला को प्रसव के लिए निजी अस्पताल ले जाती मिली तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए। विकास भवन सभागार में हुई बैठक में डीएम ने जिले में चल रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 66 प्रतिशत मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक लाने में आशा और आशा संगिनी की भूमिका अहम है। क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी नियमित निगरानी की जाए और प्रसव के समय उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

नौ महीने तक गर्भवती की निगरानी

डीएम ने कहा कि गर्भवती महिला की देखभाल केवल प्रसव के समय नहीं, बल्कि पूरे नौ महीने तक होनी चाहिए। आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं के संपर्क में रहें और उनकी नियमित जांच व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की जानकारी रखें। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव बढ़ने से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को और कम किया जा सकता है। प्रसव के बाद नवजात की देखभाल पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। कम वजन वाले बच्चों की लगातार निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया।

समय से मिले आशाओं का मानदेय

डीएम ने आशा बहू और आशा संगिनी को समय से मानदेय उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए उनके भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

डॉक्टर समय पर पहुंचें, बाहर की दवा लिखी तो कार्रवाई

बैठक में डीएम ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्साधिकारियों से कहा कि डॉक्टर समय से अस्पताल पहुंचें और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराएं। मरीजों को बाहर से दवा लिखने की शिकायत मिलने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी।बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण, परिवार नियोजन, संचारी रोग नियंत्रण, जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान गोल्डन कार्ड समेत विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। डीएम ने सभी कार्यक्रमों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए। बैठक में एसीएमओ डॉ. जेआर सिंह, डॉ. नरेंद्र सिंह, पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके शुक्ला, महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरविंद आनंद समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सीएमओ उपस्थित नहीं रहे।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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