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24 वर्ष बाद हुआ दोषमुक्त : जारी हुआ बरी होने का आदेश,फिर भी जेल की दीबारों में सजा काट रहा मैनपुरी का निर्दोष-आजाद खान

THE LUCKNOW TIMES

Thu, Jan 22, 2026
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उत्तर प्रदेश बरेली : दरअसल न्यायालय से बरी होने के बाद भी आज़ादी न मिलना यह सुनने में भले ही अजीब लग रहा होगा किन्तु मैनपुरी जिले के रहने वाले 45 वर्षीय आज़ाद खान के साथ ऐसा ही हुआ है।

करीब 24 वर्ष जेल में बिताने पश्चात इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक माह पूर्व दोषमुक्त होने के बाद भी आज़ाद खान बरेली सेंट्रल जेल में बंद है जिसकी वजह कोई नया मुकदमा या किसी प्रकार की सजा नहीं बल्कि जेल से बरी होने का आदेश की प्रमाणित प्रति जेल प्रशासन तक न पहुंचना बताया जा रहा है।

बरेली की जेल में मौजूद आजाद खान मैनपुरी जिले के ग्राम व्योती कटरा निवासी है जो माह अक्टूबर सन 2000 में मात्र 21 वर्ष का था तब उसे देर रात्रि हुई एक डकैती के मामले में पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जहाँ न्यायालय ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 395,(डकैती)एवं 397,(डकैती के दौरान जानलेवा हमला किए जाने)के तहत दोषी ठहराते हुए जेल भेज दिया था तब से आज़ाद खान की ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा सलाखों में व्यतीत हो गया वह नाम का ही आजाद रहकर 24 वर्षो से सलाखों में 24 वर्षो से कैद है।

लम्बे समयँ तक चली कानूनी लड़ाई के बाद 19 दिसंबर सन 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजाद के मामले में बड़ा फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आज़ाद खान के खिलाफ एक भी प्रत्यक्षदर्शी एवं ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं कर सका जिसके आधार पर अदालत ने उसकी सजा को रद्द करते हुए उसे पूर्णत्या दोषमुक्त कर बरी दिया।बावजूद इसके आज़ाद खान अभी भी जेल में है।पुलिस एवं जेल प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।

बताते चलें कि मैनपुरी सर्किल ऑफिसर संतोष सिंह का कहना है कि उन्हें आज़ाद खान के बरी होने का कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है जिस कारण वे कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।वहीं बरेली सेंट्रल जेल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।उक्त मामला न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया में देरी और लापरवाही को उजागर कर रहा है बल्कि एक निर्दोष व्यक्ति के जीवन के अमूल्य वर्षों के नुकसान की कहानी भी दोहराता है।

सोंचनिए बात यह है कि व्यक्ति को कानून ने निर्दोष घोषित कर दिया फिर वह जेल की दीवारों के बीच आज़ादी का इंतज़ार क्यों कर रहा है।इस पर सवाल खड़े होते हैँ कि आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन।

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