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भांग की खपत दर्ज : फिर भी दवाओं में मानक पर सवाल

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Fri, Aug 14, 2026
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ओम फार्मा में नारकोटिक्स टीम ने उत्पादन, कच्चा माल और तैयार-अधबने माल का स्टॉक भी जांचा

उन्नाव। नेहरू बाग औद्योगिक क्षेत्र स्थित ओम फार्मा में एंटी नारकोटिक्स टीम की करीब आठ घंटे चली जांच ने फैक्टरी में दवाओं के निर्माण से ज्यादा उसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। फैक्टरी में भांग के इस्तेमाल वाली औषधियों का फार्मूला आयुर्वेद विभाग से स्वीकृत होने और आबकारी विभाग के स्तर से निर्धारित मात्रा में भांग उपलब्ध कराए जाने के बावजूद दवाओं में मानक से अधिक भांग और अन्य नशीले पदार्थ मिलाए जाने की शिकायत टीम तक पहुंची। जांच के दौरान दो वटी के नमूने सील किए गए हैं। अब इनकी रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होगी। जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र के अनुसार, कानपुर निवासी संचालक संजय जायसवाल ने आयुर्वेद विभाग से औषधियों के फार्मूले की स्वीकृति ले रखी है। फैक्टरी में भांग मिश्रित राजश्री वटी, रायवटी समेत अन्य औषधियां तैयार की जाती हैं। आबकारी विभाग के अनुसार, फैक्टरी को हर तीन महीने में तीन क्विंटल भांग उपलब्ध कराई जाती है।

आठ घंटे में उत्पादन से लेकर स्टॉक तक खंगाला

नारकोटिक्स टीम ने जांच के दौरान सिर्फ तैयार दवाओं के नमूने ही नहीं लिए, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया को भी देखा। फैक्टरी में मौजूद कच्चे माल, तैयार और अधबने माल, भांग के स्टॉक तथा उनसे संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की गई। मौके पर बड़ी मात्रा में बना और अधबना माल भी रखा मिला। टीम ने यह भी देखा कि औषधियों में भांग का इस्तेमाल किस प्रक्रिया से किया जा रहा है और उपलब्ध स्टॉक का रिकॉर्ड दस्तावेजों से मेल खाता है या नहीं। संदेह के आधार पर दो वटी के नमूने सील किए गए हैं। इनकी जांच रिपोर्ट से यह पता चलेगा कि औषधियों में भांग की मात्रा स्वीकृत फार्मूले और निर्धारित मानक के अनुरूप है या नहीं। साथ ही शिकायत में लगाए गए अन्य नशीले पदार्थों के आरोप की भी जांच रिपोर्ट से स्थिति साफ हो सकती है।

सवाल सिर्फ सैंपल का नहीं, निगरानी का भी

फैक्टरी में भांग के इस्तेमाल की अनुमति और औषधियों के फार्मूले की स्वीकृति पहले से होने के बावजूद यदि दवाओं में मानक से अधिक भांग या किसी अन्य नशीले पदार्थ के इस्तेमाल की शिकायत नारकोटिक्स टीम तक पहुंची है तो नियमित निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब, जब फैक्टरी में बड़ी मात्रा में बना और अधबना माल मौजूद मिला और यहां नियमित रूप से भांग की खपत होती है। हालांकि अभी जांच में किसी विभागीय अधिकारी की प्रत्यक्ष लापरवाही साबित नहीं हुई है। सैंपल और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कहीं स्वीकृत फार्मूले से हटकर उत्पादन तो नहीं किया जा रहा था, स्टॉक का हिसाब सही था या नहीं और निगरानी में किस स्तर पर कमी रही। जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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