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: अंधेरे में डूबी मेन रोड, तिरंगा लाइटों से राहगीरों को सहारा, 3500 लाइटें खराब

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Tue, Sep 9, 2025
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पालिका और कंपनी की खींचतान में उजड़ा शहर का सबसे व्यस्त मार्ग

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

उन्नाव। शहर की धड़कन कही जाने वाली मेन रोड अब रात ढलते ही अंधेरे में डूब जाती है। सड़क किनारे लगे हाईमास्ट और एलईडी स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। हालत यह है कि पूरे मार्ग पर मुश्किल से एक-दो लाइटें ही जल रही हैं। मजबूरी में लोग तिरंगा लाइटों के सहारे सफर कर रहे हैं, जिन्हें महज़ सजावट के लिए लगाया गया था। सड़क पर अंधेरे का आलम इतना गहरा है कि वाहन चालक और पैदल यात्री दोनों ही खतरे में हैं। रात के समय सड़क पार करना खतरनाक हो गया है।

सड़क पर खतरा

अंधेरे में वाहन चालक और पैदल यात्री दोनों ही खतरे में हैं। रात में सड़क पार करना बेहद जोखिम भरा हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि अंधेरा होने के कारण ग्राहक देर शाम से ही आना बंद कर देते हैं, जिससे व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है। कई बार राहगीर गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।

करोड़ों की लाइटें बनी कबाड़

नगर पालिका ने शहर को रोशन करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन हाल यह है कि हाईमास्ट और एलईडी लाइटें कबाड़ बन चुकी हैं। मरम्मत और नियमित मेंटेनेंस का कोई इंतज़ाम नहीं किया गया।

12 करोड़ का ठेका, दो साल में दम तोड़ दीं लाइटें

साल 2019 में शासन ने बेसिल कंपनी को 12 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। कंपनी ने 6876 एलईडी लाइटें लगाईं। लेकिन दो साल में ही करीब 3500 लाइटें खराब हो गईं। पालिका ने इस पर भुगतान रोक दिया।

कंपनी और पालिका में ठन गई

शुरुआत में कंपनी ने कुछ लाइटें बदलीं और मरम्मत भी कराई, लेकिन बाद में हाथ खड़े कर दिए। 2023 में कुछ लाइटें ठीक करने के बाद कंपनी ने भुगतान न मिलने पर काम पूरी तरह छोड़ दिया। नतीजा यह है कि आज भी 3500 लाइटें खराब पड़ी हैं और सड़कों पर अंधेरा कायम है।

खर्च पर सवाल

नगर पालिका सूत्रों का कहना है कि जिन लाइटों का खर्च 12 करोड़ दिखाया गया, वही काम महज 4 करोड़ में संभव था। यानी मानक से चार गुना ज्यादा खर्च के बाद भी व्यवस्था फेल साबित हुई। पीडब्ल्यूडी से पूरे मामले का सर्वे भी कराया जा चुका है, लेकिन नतीजे अब तक कागजों तक सीमित हैं।

नगर पालिका का पक्ष

ईओ नगर पालिका एसके गौतम ने कहा शहर में मार्ग प्रकाश व्यवस्था में बजट की समस्या हो रही है। किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। लाइटें लगाने वाली फर्म को कई बार नोटिस दिया गया लेकिन वह टेंडर की शर्तों का उल्लंघन कर रही है। नगर विकास विभाग सचिव को भी रिपोर्ट भेजी गई है।

कंपनी का जवाब

बेसिल कंपनी के प्रोजेक्ट एग्जीक्यूटिव उपेंद्र राय ने बताया कि नगर पालिका से अभी भुगतान नहीं मिला है। इस कारण 2024 से मरम्मत नहीं करा रहे हैं। सात साल का एग्रीमेंट एनर्जी सेविंग के आधार पर हुआ था, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी के आधार पर चार करोड़ रुपये देने की बात कही जा रही है, जो शर्तों का उल्लंघन है। 2018 में पालिका क्षेत्र में चार हजार लाइटें थीं, तब हर महीने दस लाख रुपये बिल आता था। अब करीब सात हजार लाइटें लगी हैं और बिल उतना ही आ रहा है। इससे पालिका को भी बचत हुई है। लेकिन भुगतान न होने से रखरखाव में दिक्कत हो रही है।

लोगों में आक्रोश

मेन रोड पर रोजाना गुजरने वाले लोग और दुकानदार नगर पालिका की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बिजली बिल की वसूली के लिए तो अभियान चलाया जाता है, लेकिन सड़कों पर अंधेरे से किसी को फर्क नहीं पड़ता। अब लोग नगर पालिका और प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।

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