क़ामयाबी की कहानी हार नही मानी। नाज़िम ब्यूरो रिपोर्ट, रामपुर : क़ामयाबी की कहानी हार नही मानी। नाज़िम ब्यूरो रिपोर्ट, रामपुर
क़ामयाबी की कहानी हार नही मानी। नाज़िम
ब्यूरो रिपोर्ट, रामपुर
रामपुर। जनपद में एक परिवार की कहानी बाढ़ में डूबा कारोबार, ग्रामोद्योग योजना ने फिर संवारी नाजिम की तकदीर; 25 परिवारों को दे रहे रोजगार
पत्नी सादिया के नाम लोन लेकर रामलीला ग्राउंड में शुरू की यूनिट, 1.25 करोड़ के कुल निवेश से खड़ा किया ई-रिक्शा प्लांट
सालाना ढाई से तीन लाख की पक्की कमाई से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च हुआ मुकम्मल, पिछले एक साल में बेचे 40 ई-रिक्शा
आपदा जब सब कुछ छीन लेती है, तब सरकारी योजनाएं और अटूट हौसला ही नई राह दिखाते हैं। रामपुर निवासी उद्यमी नाजिम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना ऐसी ही जीवनदायिनी साबित हुई। वर्ष 2022 की प्रलयंकारी बाढ़ में 50 लाख रुपये का प्लांट डूबने और भारी आर्थिक तंगी में घिरने के बाद नाजिम ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी पत्नी सादिया रईस के नाम से ग्रामोद्योग विभाग में आवेदन कर 9.5 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया। इस वित्तीय संबल में अपनी बची-खुची पूंजी मिलाकर उन्होंने करीब 1.25 करोड़ रुपये के कुल निवेश से शहर के रामलीला ग्राउंड स्थित श्मशान घाट रोड पर ई-रिक्शा निर्माण की पूर्ण यूनिट स्थापित कर दी। आज नाजिम न सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मान के साथ कर रहे हैं, बल्कि 25 स्थानीय कारीगरों को नियमित आजीविका देकर ग्रामीण स्वावलंबन और उद्यमशीलता की मिसाल बन गए हैं।
बाढ़ का कहर: 50 लाख का प्लांट डूबा, खत्म हो गई थी जमा-पूंजी
वर्ष 2022 में आई बाढ़ ने नाजिम का सब कुछ तबाह कर दिया था। उस समय वह 'वेस्टर्न ऑटो प्लास्टिक पार्ट्स' नाम से प्लांट चलाते थे, जहां बाइक के वाइजर, मडगार्ड और ऑटो पार्ट्स तैयार होकर बजाज जैसी नामचीन कंपनियों को सप्लाई होते थे। बाढ़ के पानी में मशीनरी और कच्चा माल डूबने से उन्हें 50 लाख रुपये से अधिक का सीधा नुकसान हुआ। काम पूरी तरह ठप हो गया और परिवार गहरे आर्थिक संकट में घिर गया। ऐसे मुश्किल दौर में बाजार के जानकारों ने उन्हें भविष्य की जरूरत यानी इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में उतरने की सलाह दी।
पत्नी सादिया के नाम लोन लेकर उठाई नई जिम्मेदारी
आर्थिक तंगी से उबरने के लिए नाजिम ने ग्रामोद्योग रोजगार योजना का रुख किया। प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कराने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी सादिया रईस के नाम से 9.5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया। नाजिम बताते हैं कि पत्नी के नाम पर कागजी औपचारिकताएं सुगमता से पूरी हुईं और विभाग का भी पूरा सहयोग मिला। इस सरकारी मदद ने उनके ठप पड़े कारोबार में ऑक्सीजन का काम किया और उन्होंने सीधे रामलीला ग्राउंड के पास नई यूनिट की नींव रख दी।
कच्चे लोहे से तैयार होती है गाड़ी, चेचिस और बॉडी सब इन-हाउस
रामलीला ग्राउंड स्थित यूनिट में केवल पार्ट्स असेंबल नहीं होते, बल्कि पूरी गाड़ी जमीन से तैयार की जाती है। नाजिम बताते हैं कि गाड़ी की मुख्य चेचिस, बाहरी बॉडी, वेल्डिंग, पैसेंजर सीट और वायरिंग का काम वे खुद अपनी यूनिट में करते हैं। चेचिस नंबर भी उनका अपना अप्रूव्ड है। सिर्फ मोटर और कंट्रोलर जैसी तकनीकी चीजें अधिकृत कंपनियों से टाई-अप कर लगाई जाती हैं।
गाड़ी को गुरुग्राम स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से बाकायदा अप्रूवल प्राप्त है। मांग के अनुरूप प्लांट में हर महीने 10 से 30 गाड़ियां तैयार होती हैं। पिछले एक वर्ष में ही वे 40 से अधिक आरटीओ रजिस्टर्ड ई-रिक्शा बाजार में उतार चुके हैं, जबकि 20 नई गाड़ियों की खेप कारखाने में तैयार खड़ी है।
सालाना तीन लाख का मुनाफा, 25 कारीगरों का संवर रहा घर
नाजिम का कहना है कि इस योजना ने उन्हें बाजार में दोबारा सिर उठाकर खड़े होने की सामाजिक प्रतिष्ठा दी है। कारोबार से सालाना करीब ढाई से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय हो जाती है, जिससे बच्चों की स्कूल फीस और घरेलू खर्चे बिना किसी रुकावट के पूरे हो रहे हैं। यूनिट में चेचिस वेल्डिंग, सीट मेकिंग, डेंटिंग-पेंटिंग और वायरिंग जैसे अलग-अलग कामों में 20 से 25 स्थानीय लोग जुड़े हैं, जिनका घर इसी कारखाने की बदौलत चल रहा है।
ईएमआई में कभी नहीं की देरी, 8-सीटर मॉडल के विस्तार की तैयारी
नाजिम बैंक लोन की नियमित ईएमआई चुका रहे हैं और आज तक उनका कोई भी भुगतान ड्यू नहीं हुआ है।
नाजिम अब वर्तमान 5-सीटर (38 इंच) मॉडल से आगे बढ़कर 8-सीटर 'L5' मॉडल (42 से 48 इंच चौड़ाई) लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अप्रूवल और प्लांट विस्तार के लिए उन्हें 30 लाख रुपये की अतिरिक्त पूंजी की दरकार है। उनका कहना है कि यदि वित्तीय मदद का दायरा बढ़े, तो रामपुर में ई-वाहन निर्माण का यह केंद्र जिले के और भी कई बेरोजगार युवाओं को काम दे सकता है।
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