Sat 25 Apr 2026

ब्रेकिंग

मंत्री धर्मपाल सिंह बोले—समय और गुणवत्ता से समझौता नहीं

गैंगस्टर महेश निषाद की 32 लाख की संपत्ति कुर्क

गाली देने से नाराज पति ने पत्नी की हत्या की, शटर के हैंडल से सिर पर किया वार

बड़ा हादसा टला,एनएचएआई की मदद से हाइवे हुआ सुचारु

सौतेली औरत ने पति के पेट में घोंपा चाकू,मुकदमा दर्जकर जाँच में जुटी पुलिस

सूचना

BREAKING NEWS

CRIME BREAKING

: पुलिस की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- आपराधिक कानून का दुरुपयोग एक गंभीर खतरा

पुलिस की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- आपराधिक कानून का दुरुपयोग एक गंभीर खतरा

  नई दिल्ली : दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को दीवानी और फौजदारी मामलों में अंतर करने के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए, शीर्ष अदालत ने कहाकि आपराधिक कानून का दुरुपयोग न्याय प्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रहा है यह मामला न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था. पीठ ने हाल के चलन की निंदा की, जहां मामले से जुड़े पक्ष अक्सर दीवानी विवादों को आपराधिक मामलों में बदल देते हैं शीर्ष अदालत ने पहले भी दीवानी विवादों में पक्षकारों द्वारा अपनी शिकायतों के शीघ्र निपटान के लिए आपराधिक मामले दर्ज कराने की इस प्रवृत्ति की आलोचना की थी पीठ ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालतें वसूली एजेंट के रूप में कार्य नहीं कर सकतीं इसके साथ ही ये बताया कि हाल के दिनों में, पक्षकार, विशुद्ध रूप से दीवानी विवाद में, धन की वसूली के लिए आपराधिक मामले दर्ज कराते हैं. पीठ ने कहा कि बकाया राशि की वसूली के लिए गिरफ्तारी के डर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने पीठ के समक्ष दलील दी कि पुलिस ऐसे मामलों से जूझ रही है और बीच में ही फंस गई है. एएसजी ने दलील दी कि अगर पुलिस मामला दर्ज करने में विफल रहती है, जहां संज्ञेय अपराध का आरोप लगाया गया है, तो उसे अदालत की आलोचना का सामना करना पड़ता है और मामला दर्ज करते समय पक्षपात का आरोप लगाया जाता है पीठ ने उत्तर प्रदेश के एक आपराधिक मामले में ये टिप्पणियां कीं. पीठ ने कहा कि धन की वसूली को लेकर हुए विवाद में एक व्यक्ति पर अपहरण का आरोप लगाया गया था   विधि अधिकारी ने दलील दी कि आमतौर पर इन शिकायतों में धन की वसूली के विवाद में आपराधिक अपराध का आरोप लगाया जाता है. पीठ ने कहा कि पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले यह देखना चाहिए कि यह दीवानी मामला है या आपराधिक. पीठ ने ज़ोर देकर कहा कि आपराधिक कानून का ऐसा दुरुपयोग न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है, पीठ ने कहा कि वह पुलिस के सामने आने वाली कठिनाइयों से अवगत है, अगर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है तो पुलिस को ललिता कुमार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के 2013 के फैसले का पालन न करने के लिए फटकार लगाई जाती है पीठ ने कहा, "अदालतें पक्षकारों से बकाया राशि वसूलने के लिए वसूली एजेंट नहीं हैं" साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक प्रणाली के इस दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती पीठ ने सुझाव दिया कि राज्य प्रत्येक जिले के लिए एक नोडल अधिकारी, अधिमानतः एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश, नियुक्त कर सकते हैं, जिनसे पुलिस यह जानने के लिए परामर्श कर सकती है कि यह एक दीवानी या आपराधिक अपराध है और उसके बाद कानून के अनुसार आगे बढ़ सकती है,शीर्ष अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से निर्देश प्राप्त करने और दो सप्ताह में अदालत को सूचित करने को कहा!

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन