स्वर्गीय अतीक मुजफ्फरपुरी की ग्यारहवीं पुण्यतिथि: एक बेटे की दिल को छू : स्वर्गीय अतीक मुजफ्फरपुरी की ग्यारहवीं पुण्यतिथि: एक बेटे की दिल को छू लेने वाली श्रद्धांजलि
आसिम अज़ीज़
Tue, Aug 18, 2026स्वर्गीय अतीक मुजफ्फरपुरी की ग्यारहवीं पुण्यतिथि: एक बेटे की दिल को छू लेने वाली श्रद्धांजलि
ब्यूरो रिपोर्ट दिल्ली,
नई दिल्ली:आज ही के दिन—18 अगस्त 2015 को—पटना के पारस अस्पताल में जब आदरणीय पिता श्री अतीक मुजफ्फरपुरी ने अंतिम साँस ली, तो हम सभी भाई-बहनों के सिर से स्नेह और मार्गदर्शन की वह छाया उठ गई, जिसकी कमी को समय का कोई भी मरहम पूरा नहीं कर सकता।
उनके इस अचानक प्रस्थान से जहाँ हम व्यक्तिगत रूप से एक अपूर्णीय क्षति के शिकार हुए, वहीं उर्दू जगत और विशेष रूप से उर्दू पत्रकारिता भी एक ऐसे निष्ठावान, खरे, ईमानदार और बेबाक संरक्षक से वंचित हो गई, जिनका संपूर्ण जीवन कलम की पवित्रता और सच्चाई की रक्षा के लिए समर्पित था। एक साहित्यकार, बुद्धिजीवी और दूरदर्शी पत्रकार के रूप में उन्होंने उर्दू साहित्य को जो अनमोल उपहार दिए और अपनी रचनाओं तथा संवाद के माध्यम से उसकी जो सींच की, वे अनंत काल तक जीवंत और प्रकाशमान रहेंगे।
कैलेंडर के पन्ने भले ही बदलते रहें और आज उनकी ग्यारहवीं बरसी के ये आँकड़े सामने हों, लेकिन हमारे लिए यह मात्र इतिहास का एक अंक नहीं है; यह वह दर्द है जो हर पल ताज़ा रहता है। आज भी उर्दू जगत जिस प्रेम और निष्ठा से उनकी सेवाओं को स्वीकार करता है, वह किसी बहुमूल्य रत्न से कम नहीं है और हमारे लिए तो वे केवल एक प्रसिद्ध लेखक नहीं, हमारे स्नेही पिता थे।
इन ग्यारह वर्षों की लंबी यात्रा में, यदि कोरोना के कठिन काल को हटा दिया जाए, तो हर वर्ष उनकी बरसी के अवसर पर उर्दू साहित्य, विशेषकर पत्रकारिता के विभिन्न विषयों पर सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन होता रहा है। इसमें देश भर के उर्दू साहित्य, पत्रकारिता और शायरी से जुड़े प्रबुद्ध जनों ने भाग लेकर उनकी साहित्यिक सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की है। आज भी इसी परंपरा को कायम रखते हुए एक संगोष्ठी और क़ुरआन ख्वानी (क़ुरआन पाठ) का आयोजन किया जा रहा है।
अल्लाह तआला का शुक्र है कि उसने पिता द्वारा छोड़े गए शैक्षणिक वृक्ष को फलने-फूलने का अवसर दिया। हम चार भाइयों में से तीन भाई मानवता की सेवा (चिकित्सा क्षेत्र) के पवित्र कर्तव्य से जुड़े हैं, जबकि सबसे बड़े होने के नाते पिता की असली विरासत—यानी साहित्य और पत्रकारिता—के एक छात्र के रूप में इस लगन को जीवित रखने का मैं विनम्र प्रयास कर रहा हूँ। मेरी दिली दुआ है कि ईश्वर मुझे इस मार्ग पर दृढ़ता प्रदान करे, यही उनकी आत्मा के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
यह नश्वर जीवन एक दिन सभी को छोड़कर अनंत यात्रा पर रवाना हो जाना है, लेकिन वास्तविक सफलता पूर्वजों के पदचिन्हों पर चलते हुए उनके मिशन और विरासत को जीवित रखना है, जिस पर अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हम सभी भाइयों को दृढ़ और स्थिर रखे। इस शोकाकुल अवसर पर संपूर्ण साहित्यिक, शैक्षणिक और पत्रकारिता जगत से अनुरोध है कि वे अपनी दुआओं में दिवंगत अतीक मुजफ्फरपुरी को याद रखें। अल्लाह दिवंगत को जन्नतुल फ़िरदौस में उच्च स्थान प्रदान करे और अपनी रहमत के साये में जगह दे, आमीन।
कलमी वारिस और (शुभचिंतक)
जावेद रहमानी
सीईओ एंड एडिटर इन चीफ
जर्नलिज्म टुडे ग्रुप
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Rampur news
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