दैनिक यात्रियों की मांग : शुक्लागंज से लखनऊ तक मेमो ट्रेन चले
Sat, Mar 28, 2026
मेमो ट्रेन संचालन, बंद इंटरसिटी बहाली और प्लेटफॉर्म सुविधाओं को लेकर सौंपा ज्ञापन
उन्नाव। रेल यात्रियों की दिक्कतों को लेकर जिला दैनिक यात्री संघ अब खुलकर सामने आ गया है। संघ के प्रतिनिधियों ने मंडल रेल प्रबंधक को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर मेगा ब्लॉक के दौरान वैकल्पिक इंतजाम करने की मांग उठाई है, ताकि रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को राहत मिल सके। संघ के विधिक सलाहकार मुजतबा हैदर रिजवी के मुताबिक 2 अप्रैल से 13 मई तक गंगा पुल पर स्लीपर बदलने का काम प्रस्तावित है। इस दौरान ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा, जिसका सीधा असर लखनऊ रूट पर रोज सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। इसे देखते हुए संघ ने शुक्लागंज से लखनऊ के बीच मेमो ट्रेनों के संचालन की मांग की है, ताकि दैनिक यात्रियों की आवाजाही बनी रहे और उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। ज्ञापन में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि कोरोना काल में बंद हुई कुछ अहम ट्रेन सेवाएं अब तक बहाल नहीं की गई हैं। इसमें वरुणा इंटरसिटी (24227/24228) और कानपुर-अयोध्या इंटरसिटी (14221/14222) शामिल हैं। संघ का कहना है कि इन ट्रेनों के बंद रहने से यात्रियों के पास सीमित विकल्प रह गए हैं, जिससे भीड़ और असुविधा दोनों बढ़ रही हैं। इन सेवाओं को जल्द दोबारा शुरू करने की मांग की गई है। यात्री सुविधाओं को लेकर भी संघ ने कई सुझाव दिए हैं। प्लेटफॉर्म नंबर एक, चार और पांच पर कोच गाइडिंग डिस्प्ले लगाने की मांग की गई है, ताकि यात्रियों को ट्रेन के डिब्बों की सही स्थिति की जानकारी मिल सके। इसके अलावा प्लेटफॉर्म दो और तीन पर पूरे शेड की व्यवस्था करने की भी बात कही गई है, जिससे गर्मी और बारिश के दौरान यात्रियों को राहत मिल सके। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो मेगा ब्लॉक के दौरान हालात और कठिन हो सकते हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में ज्ञानेंद्र पांडेय, आशीष बाजपेयी और मनोज कुमार तिवारी समेत कई सदस्य मौजूद रहे।
विश्व रंगमंच दिवस : उन्नाव के कलाकारों ने बताई मंच की अहमियत
Sat, Mar 28, 2026
कला के जरिए समाज को दिशा देने पर हुई चर्चा
उन्नाव। शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर उदय सांस्कृतिक संस्थान की ओर से एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में शहर के रंगकर्मियों और कला से जुड़े लोगों ने भाग लेकर रंगमंच की भूमिका, उसके बदलते स्वरूप और युवाओं के लिए उसमें मौजूद अवसरों पर खुलकर चर्चा की। गोष्ठी की शुरुआत में वरिष्ठ रंगकर्मी सुरेन्द्र वर्मा ‘बाबा जी’ ने रंगमंच की सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंच सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज को आईना दिखाया जाता है। नाटक लोगों तक ऐसे संदेश पहुंचाते हैं, जो सीधे दिल और दिमाग पर असर डालते हैं और समाज में जागरूकता लाने का काम करते हैं। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ कलाकार मो. जब्बार अकरम ने रंगमंच को करियर के नजरिए से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहले जहां अभिनय को पेशे के रूप में चुनना मुश्किल माना जाता था, वहीं अब हालात काफी बदल चुके हैं। सरकार और निजी संस्थानों की पहल से लखनऊ, बनारस, दिल्ली और पूना जैसे शहरों में एक्टिंग के लिए बेहतर प्रशिक्षण संस्थान उपलब्ध हैं। यहां से प्रशिक्षण लेकर युवा अपने करियर को नई दिशा दे रहे हैं। रंगकर्मी एस. के. टाइगर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि रंगमंच अभिनय की बुनियाद मजबूत करता है। उनके मुताबिक, जो कलाकार मंच से जुड़ा होता है, उसके लिए फिल्मों और वेब सीरीज़ में काम हासिल करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है, क्योंकि उसे अभिनय की मूल समझ पहले से होती है।वहीं राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि रंगमंच केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व को भी निखारता है। मंच पर काम करने से संवाद, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है, जो जीवन के हर क्षेत्र में काम आती है।गोष्ठी में जया उपाध्याय, रफ़ीक अहमद, रहमान रूमी और शफी अहमद खान समेत अन्य रंगकर्मियों ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि डिजिटल दौर में भी रंगमंच की अहमियत कम नहीं हुई है, बल्कि यह नए रूप में और ज्यादा प्रभावी बनकर उभर रहा है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य न सिर्फ रंगमंच को बढ़ावा देना है, बल्कि नई पीढ़ी को इस विधा से जोड़ना भी है, ताकि कला और संस्कृति की यह परंपरा आगे बढ़ती रहे।
मजदूरों की मजदूरी पर डाका : प्रधान के खाते में पहुंचे लाखों रुपये, अधिकार सीज़
Fri, Mar 27, 2026
जांच में खुलासा, डीएम ने कड़ा एक्शन लेते हुए तीन सदस्यीय टीम को सौंपी पंचायत की जिम्मेदारी
उन्नाव। जिले के सफीपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत पीखी में मनरेगा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के प्रधान हसीबुद्दीन पर मजदूरों की मजदूरी में गड़बड़ी करने का आरोप साबित हुआ है। जांच में पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी ने सख्त कार्रवाई करते हुए प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं। मामले की शुरुआत गांव के ही मेराज द्वारा की गई शिकायत से हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंचायत भवन निर्माण के दौरान मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी का बड़ा हिस्सा हड़प लिया गया है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी और आरईडी विभाग के एक्सईएन को जांच सौंपी।
जांच में क्या सामने आया
अधिकारियों की जांच में पाया गया कि पंचायत भवन निर्माण में मिट्टी भराई और मजदूरी के लिए कुल 9.19 लाख रुपये का भुगतान होना था। लेकिन रिकॉर्ड और ग्राम स्वराज पोर्टल के आंकड़ों की पड़ताल में यह सामने आया कि 7.60 लाख रुपये सीधे प्रधान के निजी खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। इस खुलासे के बाद प्रशासन हरकत में आया और प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। हालांकि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
डीएम का एक्शन
जिलाधिकारी गौरांग राठी ने मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए प्रधान के सभी अधिकार सीज कर दिए। साथ ही उस समय तैनात ग्राम सचिव और एक ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
नई टीम को जिम्मेदारी
प्रधान के अधिकार समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायत के कामकाज को सुचारु रखने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक सिन्हा के अनुसार, इस टीम में हसरतुन, रजनी और बबली को शामिल किया गया है, जिसमें हसरतुन को टीम का प्रमुख बनाया गया है। अब यही टीम पंचायत के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करेगी।
लेखा जांच के बाद होगा बड़ा फैसला
मामले की अंतिम जांच जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को सौंप दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मनरेगा जैसी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भी इस कार्रवाई के बाद उम्मीद जगी है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और मजदूरों का हक उन्हें वापस मिलेगा।