सड़क हादसा : ऑटो पलटने से मजदूर की गई जान
Mon, Jun 22, 2026
काम से लौटते वक्त हुआ हादसा, दो मासूम बेटों के सिर से उठा पिता का साया
उन्नाव। हसनगंज थाना क्षेत्र में सोमवार शाम तेज रफ्तार ऑटो के पलटने से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा मुस्तफाबाद खड़हरा गांव के बाहर हुआ। घटना की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मृतक अपने परिवार का इकलौता सहारा बताया जा रहा है। मुस्तफाबाद खड़हरा गांव निवासी 30 वर्षीय सुरेश पुत्र स्वर्गीय राम भरोसे मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। रोज की तरह सोमवार को भी वह काम खत्म कर ऑटो से घर लौट रहा था। गांव के बाहर पहुंचते ही तेज रफ्तार ऑटो अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। हादसा इतना भीषण था कि ऑटो में सवार सुरेश गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे किसी तरह बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। हादसे की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी। सूचना मिलते ही हसनगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक सुरेश के परिवार में पत्नी और दो छोटे बेटे हैं। उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में भी घटना के बाद शोक का माहौल है। प्रभारी निरीक्षक शरद कुमार ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। साथ ही ऑटो चालक और वाहन की स्थिति के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
ई-स्टाम्पिंग में बदलाव के विरोध में उतरे वकील : पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
Mon, Jun 22, 2026
बार एसोसिएशन ने सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन, नई प्रणाली से जनता और अधिवक्ताओं को हो रही परेशानी
उन्नाव। ई-स्टाम्पिंग व्यवस्था में किए गए बदलावों के विरोध में सोमवार को बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। बार एसोसिएशन की ई-लाइब्रेरी में आयोजित बैठक में अधिवक्ताओं ने नई व्यवस्था को जनविरोधी बताते हुए पुरानी रजिस्ट्री और स्टाम्प प्रणाली बहाल करने की मांग उठाई। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। बैठक की अध्यक्षता बार एसोसिएशन अध्यक्ष गिरीश कुमार मिश्र ने की, जबकि संचालन महामंत्री अनुज कुमार बाजपेयी ने किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ई-स्टाम्प खरीद प्रक्रिया में किए गए बदलावों से न केवल अधिवक्ताओं बल्कि आम लोगों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं का कहना था कि नई प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली साबित हो रही है, जिससे रजिस्ट्री कार्य प्रभावित हो रहे हैं। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार से तत्काल इस बदलाव को वापस लेने और पूर्व से लागू व्यवस्था को बहाल करने की मांग की जाए। बैठक के बाद बार एसोसिएशन अध्यक्ष और महामंत्री के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि जनहित को देखते हुए रजिस्ट्री और स्टाम्प की पुरानी व्यवस्था को यथावत रखा जाए। डीएम ने अधिवक्ताओं का ज्ञापन प्राप्त कर उसे शासन तक भेजने का आश्वासन दिया। साथ ही अधिवक्ताओं की सुरक्षा और अन्य समस्याओं के समाधान में सहयोग का भरोसा भी दिलाया। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ल, प्रकाश कुमार निगम, राम नारायण द्विवेदी, पूर्व महामंत्री बृजेंद्र कुमार शुक्ल निराला, रामकिशोर पाल, विष्णुराम पाण्डेय और अंकित तिवारी समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता बैठक में मौजूद रहे।
नए गंगा पुल की राह साफ करने उतरी टीम : मिश्रा कॉलोनी में शुरू ध्वस्तीकरण
Sun, Jun 21, 2026
ध्वस्तीकरण के बीच कई परिवारों ने खुद ही खाली करना शुरू किया मकान
उन्नाव। शुक्लागंज में गंगा रिवर पर प्रस्तावित नए पुल निर्माण को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। रविवार को सेतु निगम, राजस्व विभाग और गंगाघाट कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने मिश्रा कॉलोनी में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। कार्रवाई के पहले दिन एक मकान को जेसीबी से गिरा दिया गया, जबकि अन्य मकान मालिकों को घर खाली करने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया। अभियान के दौरान सरला देवी का मकान जेसीबी मशीन की मदद से पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। प्रशासन की कार्रवाई शुरू होते ही आसपास के कई मकान मालिकों ने भी अपने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया। कुछ लोग खुद ही मकान खाली कर तोड़फोड़ में जुटे नजर आए, ताकि सामान का नुकसान कम हो सके। नायब तहसीलदार धीरज त्रिपाठी ने बताया कि पुल निर्माण की जद में कुल 39 मकान आ रहे हैं। इनमें अधिकांश भवन स्वामियों को नियमानुसार मुआवजे के चेक पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। हालांकि छह मकानों को लेकर मालिकाना हक और किरायेदारी विवाद बना हुआ है, जिस वजह से उनका मुआवजा फिलहाल लंबित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवादित छह मकानों पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। बाकी मकानों को निर्माण कार्य की जरूरत के अनुसार हटाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि परियोजना में देरी न हो, इसके लिए अधिग्रहण और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तय समय के भीतर पूरी की जाएगी। कार्रवाई के दौरान सेतु निगम के अधिकारी, लेखपाल और निर्माण एजेंसी के इंजीनियर मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। कुछ मकान मालिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। इस पर प्रशासन ने रविवार तक का अतिरिक्त समय देते हुए चेतावनी दी कि सोमवार तक मकान खाली न करने पर प्रशासनिक सहायता से सामान हटाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी की जाएगी।