संकट आया तो मैदान में उतरे पंकज गुप्ता : मदद के साथ बढ़ाया लोगों का भरोसा
Mon, Sep 14, 2026
बाढ़, आग और कोरोना काल में प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर जुटे राहत के काम में
उन्नाव। जनप्रतिनिधि की असली परीक्षा चुनाव के दौरान नहीं, बल्कि उस वक्त होती है जब उसके क्षेत्र का कोई परिवार मुसीबत में होता है। सदर विधायक पंकज गुप्ता के राजनीतिक सफर में ऐसे कई मौके आए, जब बाढ़, आग और कोरोना जैसी परिस्थितियों में वह प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे। राहत की जरूरत वाले परिवारों से बातचीत करने के साथ ही उन्होंने उपलब्ध संसाधनों से मदद पहुंचाने की कोशिश की। पतारी अग्निकांड के दौरान भी विधायक मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति जानी। आग से गृहस्थी का सामान गंवाने वाले लोगों के बीच पहुंचकर राहत की जरूरत समझी और प्रशासनिक स्तर पर मदद दिलाने की पहल की। इसी तरह जिले में बाढ़ के दौरान जलभराव और प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के साथ लोगों की समस्याएं सुनने का सिलसिला भी जारी रहा।
कोरोना में घर-घर मदद की कोशिश
कोरोना संक्रमण का दौर आम लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों के लिए भी बड़ी चुनौती लेकर आया था। आवाजाही पर रोक और संक्रमण के डर के बीच जरूरतमंद परिवारों को राशन और दूसरी जरूरी चीजों की जरूरत पड़ रही थी। इस दौरान पंकज गुप्ता और उनकी टीम की ओर से जरूरतमंदों तक राशन पहुंचाने का काम किया गया। गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कराने में भी सहयोग किया गया। विधायक के अनुसार, उस समय सबसे जरूरी था कि जरूरतमंद परिवारों को अकेला महसूस न होने दिया जाए। इसी सोच के साथ कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों से संपर्क किया गया।
आपदा में राजनीति से ज्यादा मदद पर जोर
बाढ़ हो या अग्निकांड, प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता घर, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों की होती है। ऐसे समय में पंकज गुप्ता का कहना रहा है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मुसीबत में पड़े व्यक्ति की मदद पहले होनी चाहिए। यही वजह है कि आपदा के दौरान वह अधिकारियों से संपर्क करने के साथ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचने पर जोर देते रहे। सदर विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क को भी वह अपने काम का हिस्सा बताते हैं। उनका कहना है कि जनता से जुड़ाव केवल चुनाव तक सीमित नहीं होना चाहिए। सामान्य दिनों में क्षेत्र की समस्याएं सुनने से लेकर संकट के समय मौके पर पहुंचने तक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी बनी रहती है।
तस्वीरों से अलग संकट का समय बताता है हकीकत
चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता की तस्वीरें और दावे आम हैं। लेकिन किसी क्षेत्र में बाढ़ आने, आग लगने या किसी परिवार पर अचानक संकट आने के बाद वहां पहुंचकर समस्या सुनना और मदद का रास्ता तलाशना अलग बात है। पंकज गुप्ता की राजनीति में ऐसे मौकों पर जमीनी स्तर पर मौजूद रहने की कोशिश को उनके समर्थक उनकी सबसे बड़ी पहचान बताते हैं। सदर क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय विधायक का फोकस जनसंपर्क और लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने पर रहा है। समर्थकों का कहना है कि इसी वजह से संकट के समय भी लोग उनसे संपर्क करते हैं। हालांकि किसी भी जनप्रतिनिधि के काम का अंतिम आकलन क्षेत्र की जनता और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है।
दो लाख रुपये लेकर प्लॉट का सौदा नहीं किया : मांगने पर घर में घुसकर पीटा
Mon, Sep 14, 2026
रुपये वापस मांगने पर दी जान से मारने की धमकी, न्यायालय के आदेश पर दो नामजद समेत सात पर रिपोर्ट
उन्नाव। प्लॉट खरीदने के लिए दिए गए दो लाख रुपये वापस मांगना गांधी नगर निवासी एक युवक को भारी पड़ गया। आरोप है कि रुपये लौटाने के बजाय प्लॉट दिखाने वाले पिता-पुत्र अपने पांच साथियों के साथ उसके घर में घुस गए और मारपीट कर दी। युवक ने आरोप लगाया कि उससे बैनामा कराने का भरोसा देकर रकम ली गई थी, लेकिन समय पूरा होने के बाद भी बैनामा नहीं कराया गया। रकम मांगने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। मामले में न्यायालय के आदेश पर कोतवाली सदर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। गांधी नगर निवासी अम्बिकेश मिश्रा ने न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि वह काफी समय से अपने लिए प्लॉट तलाश रहे थे। इसी दौरान मोहल्ले में रहने वाले सौरभ गुप्ता से उनकी बात हुई। सौरभ ने बताया कि उसके पिता विजय गुप्ता प्लॉटिंग का काम करते हैं और वह उनकी जरूरत के हिसाब से जमीन दिला सकते हैं। आरोप है कि सौरभ ने उन्हें बिछिया ब्लॉक के मुर्तजानगर में एक प्लॉट दिखाया। जमीन पसंद आने के बाद दोनों पक्षों के बीच बैनामा कराने की बात तय हुई। अम्बिकेश के मुताबिक करीब दो महीने पहले सौरभ के कहने पर उन्होंने विजय गुप्ता को घर पर 40 हजार रुपये बयाने के तौर पर दिए थे। इसके बाद सौरभ और विजय अलग-अलग तारीखों में उनके घर पहुंचे और 40-40 हजार रुपये लेते रहे। शिकायतकर्ता के मुताबिक बैनामा होने पर यह रकम सौदे में समायोजित करने की बात कही गई थी।
समय पूरा हुआ तो बदल गया रवैया
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दो महीने का तय समय पूरा होने के बाद उसने सौरभ और विजय से बैनामा कराने के लिए कहा, लेकिन दोनों तैयार नहीं हुए। इसके बाद उसने एक जुलाई को दोनों से अपने दिए गए दो लाख रुपये वापस मांगे। आरोप है कि दोनों ने रुपये लौटाने के बजाय उसे इंतजार करने के लिए कहा।
रात में पांच साथियों के साथ पहुंचने का आरोप
अम्बिकेश के मुताबिक नौ जुलाई की रात करीब आठ बजे वह अपने घर पर था। इसी दौरान सौरभ और विजय पांच अन्य लोगों के साथ घर के अंदर आ गए। आरोप है कि रुपये मांगने की बात पर दोनों ने उससे विवाद शुरू कर दिया। उसे धमकाते हुए कहा गया कि अगर वह पैसों के लिए ज्यादा दबाव बनाएगा तो उसे जान से मार दिया जाएगा। आरोप है कि विरोध करने पर सभी ने उसके साथ मारपीट की, जिससे शरीर पर कई चोटें आईं।
थाने से एसपी तक पहुंचा मामला
अम्बिकेश ने बताया कि घटना के बाद वह रिपोर्ट दर्ज कराने कोतवाली सदर गया था। आरोप है कि पुलिस ने जांच का भरोसा देकर तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं की और चोटों का मेडिकल भी नहीं कराया। इसके बाद उसने जिला अस्पताल पहुंचकर अपना मेडिकल कराया। पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने पर 10 जुलाई को एसपी को भी प्रार्थनापत्र दिया। कार्रवाई न होने पर उसने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश के बाद कोतवाली सदर पुलिस ने सौरभ गुप्ता, विजय गुप्ता और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दो पासपोर्ट, अलग जन्मतिथि... : कूटरचित अभिलेख से धोखाधड़ी का आरोप
Mon, Sep 14, 2026
एक में 1968 तो दूसरे में 1986 की जन्मतिथि दर्ज, किला चौकी प्रभारी की तहरीर पर रिपोर्ट
उन्नाव। एक ही व्यक्ति के नाम से जारी दो पासपोर्ट में अलग-अलग जन्मतिथि, पिता का नाम और पता दर्ज होने का मामला सामने आया है। जिला पासपोर्ट अधिकारी और प्रभारी एलआईयू की आख्या के आधार पर किला चौकी प्रभारी उग्रसेन सिंह की तहरीर पर कोतवाली सदर में मोहम्मद रफीक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस ने अब दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। मामला अनवार नगर निवासी मोहम्मद रफीक से जुड़ा है। पासपोर्ट विभाग की ओर से पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक उसके नाम से एक पासपोर्ट 19 अप्रैल 2015 को जारी हुआ था। इसमें रफीक के पिता का नाम मोहम्मद सगीर, पता 160 शेखवाड़ा और जन्मतिथि 15 जुलाई 1968 दर्ज है। इसके करीब नौ साल बाद चार अक्तूबर 2024 को मोहम्मद रफीक के नाम से दूसरा पासपोर्ट जारी हुआ। इस दस्तावेज में पिता का नाम भग्गा, पता 38/8 अनवार नगर और जन्मतिथि 15 जुलाई 1986 दर्ज है। यानी दोनों पासपोर्ट में जन्मतिथि में 18 साल का अंतर है। दोनों दस्तावेजों में मां का नाम समान बताया गया है।
दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान पासपोर्ट के साथ लगाए गए अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। पुलिस को दी गई रिपोर्ट में आधार कार्ड और वोटर आईडी समेत अन्य अभिलेखों को कूटरचित तरीके से तैयार कर इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इसे पासपोर्ट बनवाने के दौरान गलत जानकारी और दस्तावेज देने का मामला माना है।
पासपोर्ट विभाग की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
जिला पासपोर्ट अधिकारी और एलआईयू की ओर से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के बाद पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था। इसके साथ पासपोर्ट से संबंधित फाइल, पासपोर्ट कार्यालय की रिपोर्ट और आधार कार्ड की प्रति समेत अन्य दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कोतवाली सदर में पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1) के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पुलिस अब करेगी दस्तावेजों का मिलान
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों पासपोर्ट बनवाने के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे और उनमें अलग-अलग जानकारी कैसे दर्ज हुई। पुलिस संबंधित अभिलेखों का मिलान करने के साथ मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।