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आजाद स्मारक में सजा कवि सम्मेलन : अनुराग मिश्र ‘गैर’ की ग़ज़ल ने लूटी महफिल

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Sat, Jan 10, 2026
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अखिलेश अवस्थी की वाणी वंदना से हुई शुरुआत, कई नामचीन कवियों ने किया काव्य पाठ

उन्नाव। शहीद ए आज़म चंद्रशेखर आज़ाद की याद में गांव बदरका स्थित आजाद स्मारक में गुरुवार की शाम साहित्य और संवेदनाओं के नाम रही। शहीद चंद्रशेखर आजाद स्मारक समिति की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि अनुराग मिश्र ‘गैर’ आकर्षण का केंद्र रहे। उनकी ग़ज़ल ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया और पंक्तियों पर बार-बार तालियां गूंजती रहीं।


अनुराग मिश्र ‘गैर’ ने जब यह पंक्तियां पढ़ीं—
“पत्थर के बाद चांद की हसरत नहीं रही,
खुद से मिला तो आपकी चाहत नहीं रही,
कासे को एक फकीर के कासे में रख दिया,
गुदड़ी में मेरी अब कोई दौलत नहीं रही” तो पूरा पंडाल शांति में डूब गया। जीवन के अनुभव, आत्मबोध और फकीरी सोच से भरी इस रचना ने श्रोताओं पर गहरा असर छोड़ा। प्रस्तुति के बाद देर तक तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती रही।


कवि सम्मेलन का शुभारंभ वरिष्ठ कवि अखिलेश अवस्थी की वाणी वंदना से हुआ। इसके बाद ओज कवि राहुल ‘विनम्र’ ने शहीद चंद्रशेखर आजाद के बलिदान को याद करते हुए वीर रस से ओतप्रोत कविता पढ़ी और राष्ट्रभक्ति का माहौल बना दिया।हास्य कवि अनुभव अज्ञानी ने रोजमर्रा की परेशानियों और चर्चित नामों पर चुटीले अंदाज में व्यंग्य किया, जिससे श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर होना पड़ा। संतोष दीक्षित ने भावनात्मक कविता के जरिए भक्ति और साहित्य का सुंदर मेल प्रस्तुत किया।
युवा कवि धीरज यादव की रचना—
“माना नहीं अमीर है, लेकिन जमीर है,
हम बिक नहीं सकते, जो कीमत लगाओगे” पढ़कर ईमानदारी और आत्मसम्मान का संदेश दिया, जिसे खूब सराहा गया।


कार्यक्रम में डॉ. विनय तिवारी ‘विनीत’ और डॉ. प्रभात सिन्हा ने भी अपनी रचनाओं से साहित्यिक स्तर को मजबूती दी। पूरे आयोजन का संचालन अनिरुद्ध सौरभ ने संतुलित और सहज अंदाज में किया। इस अवसर पर समिति के सचिव राजेश शुक्ला, जेके दीक्षित, सुयश बाजपेई, अमित शुक्ल, पप्पू मिश्र, शंभू शुक्ल, प्रीतू शुक्ल, पप्पू पांडेय सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। कवि सम्मेलन देर रात तक चला और श्रोताओं ने इसे एक यादगार साहित्यिक शाम बताया।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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