अस्पताल प्रकरण में डीएम सख्त : जांच टीम गठित करने के निर्देश
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Thu, Oct 29, 2026
सीएमओ बोले- अस्पताल का लाइसेंस जारी करने का सवाल ही नहीं उठता, अस्पताल अब भी सील
उन्नाव। सील किए जा चुके उत्तम हॉस्पिटल को नए नाम से दोबारा शुरू कराने के लिए 3.50 लाख रुपये मांगने के आरोपों पर प्रशासन ने जांच शुरू कराने की तैयारी की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर उठे सवालों पर डीएम घनश्याम मीना ने गंभीरता दिखाई है। उन्होंने सीडीओ को टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने आरोपों को खारिज किया है। सीएमओ डॉ. एके शर्मा का कहना है कि संबंधित अस्पताल अभी भी सील है और उसे दोबारा चलाने की कोई अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में रुपये मांगने का आरोप बेबुनियाद है। दरअसल, शेखपुर नरी स्थित उत्तम हॉस्पिटल को जुलाई में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम ने सील कर दिया था। अस्पताल संचालक देवकांत उत्तम पर अस्पताल में काम करने वाली युवती से दुष्कर्म और पुलिस से शिकायत करने पर उसकी हत्या करने का आरोप है। अस्पताल संचालक की पत्नी के नाम पर पंजीकृत था। कार्रवाई के बाद से अस्पताल बंद है।
डीएम ने सीडीओ को सौंपी जांच की जिम्मेदारी
मामला तब चर्चा में आया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ। इसमें स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के कार्यालय में अस्पताल का नाम बदलकर नए सिरे से पंजीकरण कराने को लेकर बातचीत होती दिखाई दे रही है। वीडियो वायरल करने वालों ने आरोप लगाया कि अस्पताल को दोबारा शुरू कराने के लिए अधिकारी ने 3.50 लाख रुपये मांगे। वीडियो सामने आने के बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा। डीएम घनश्याम मीना ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीडीओ को जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। जांच में वीडियो की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाएगी।
सीएमओ बोले, अस्पताल सील है तो लाइसेंस कैसे जारी होगा
मामले में सीएमओ डॉ. एके शर्मा ने रुपये मांगने के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उत्तम हॉस्पिटल अभी भी सील है। ऐसे में उसे दोबारा संचालित करने के लिए लाइसेंस जारी करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराई जा रही है। वीडियो में दिखाई दे रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने भी रुपये मांगने के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि बातचीत में कहीं भी रुपयों की मांग नहीं की गई।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
अब प्रशासनिक जांच में यह देखा जाएगा कि वायरल वीडियो में दिखाई गई बातचीत किस संदर्भ में हुई थी और अस्पताल के नए नाम से पंजीकरण कराने की बात किस आधार पर की जा रही थी। साथ ही 3.50 लाख रुपये मांगने के आरोपों की भी पड़ताल होगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के सील होने और रुपये मांगने की बात को गलत बता रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: द लखनऊ टाइम्स वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
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Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news
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