ओवरलोड वाहनों पर प्रशासन सख्त : रातभर चला चेकिंग अभियान
Tue, Jun 16, 2026
24 घंटे के अभियान में 63 वाहनों का चालान, 29 वाहन जब्त कर 6.25 लाख का जुर्माना
उन्नाव। जिले में अवैध पार्किंग, ओवरलोडिंग और खनिज के अवैध परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी घनश्याम मीणा के निर्देश पर चलाए गए 24 घंटे के विशेष अभियान में परिवहन नियमों की अनदेखी करने वालों पर व्यापक कार्रवाई की गई। संयुक्त टास्क फोर्स ने जिले के विभिन्न मार्गों पर जांच अभियान चलाकर 63 वाहनों का चालान किया, जबकि गंभीर अनियमितताएं मिलने पर 29 वाहनों को सीज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान कुल 6.25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अभियान के दौरान सबसे बड़ी कार्रवाई जाजमऊ क्षेत्र में सामने आई। सोमवार देर रात सिटी मजिस्ट्रेट मनोज सिंह के नेतृत्व में संयुक्त टीम वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान करीब 12 बजे एक डंपर को रोककर उसकी जांच की गई। जांच में पता चला कि 47 टन क्षमता वाले वाहन में 73 टन मौरंग लदी हुई थी। यानी डंपर निर्धारित क्षमता से 26 टन अधिक भार लेकर सड़क पर दौड़ रहा था। ओवरलोडिंग की पुष्टि होने पर सिटी मजिस्ट्रेट ने तत्काल वाहन को सीज करने के निर्देश दिए।अभियान के दौरान केवल ओवरलोडिंग ही नहीं, बल्कि बिना वैध खनिज प्रपत्रों के खनिज परिवहन, सड़क किनारे अवैध पार्किंग, बिना नंबर प्लेट के वाहन संचालन तथा अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आए। जांच टीम ने ऐसे सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ओवरलोड वाहन न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं, बल्कि सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं बिना वैध दस्तावेजों के खनिज परिवहन से सरकारी राजस्व को भी क्षति पहुंचती है। इसी को देखते हुए जिले में लगातार निगरानी बढ़ाई गई है।जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन, ओवरलोडिंग और यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित जांच करने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन में लगे वाहन संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
सीएम के कार्यक्रम की तैयारियां तेज : डीएम-एसएसपी ने परखी व्यवस्थाएं
Tue, Jun 16, 2026
कार्यक्रम स्थल पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर अधिकारियों ने बनाई रणनीति
उन्नाव। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित उन्नाव दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियों की रफ्तार बढ़ा दी है। कार्यक्रम को लेकर मंगलवार को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की टीम ने सदर कोतवाली क्षेत्र के भौनीखेड़ा पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा इंतजामों से लेकर यातायात, पार्किंग और जनसुविधाओं तक हर बिंदु पर तैयारियों की समीक्षा की।जिलाधिकारी घनश्याम मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह के नेतृत्व में पहुंचे अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का भ्रमण कर विभिन्न विभागों से अब तक हुई तैयारियों की जानकारी ली। अधिकारियों ने मंच निर्माण, वीआईपी मूवमेंट, आगंतुकों के बैठने की व्यवस्था और प्रवेश व निकास मार्गों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी कृति राज, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सुशील कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी अखिलेश सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी शैलेन्द्र लाल सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भीड़ प्रबंधन की रणनीति पर भी चर्चा की। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। कार्यक्रम स्थल के आसपास बैरिकेडिंग, चेकिंग प्वाइंट और पार्किंग स्थलों की स्थिति का निरीक्षण किया गया। साथ ही यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक मार्गों और वाहन पार्किंग की योजना को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल पर पेयजल, विद्युत आपूर्ति, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। डीएम और एसएसपी ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसके लिए तैयारियों की लगातार निगरानी की जा रही है और समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए आगे भी निरीक्षण और समीक्षा का क्रम जारी रहेगा।
34 साल पुरानी जमीन पर चला बुलडोजर : परिवारों ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
Tue, Jun 16, 2026
सर्वे विभाग पर नक्शे में हेरफेर का आरोप, पीड़ितों ने उच्च स्तरीय जांच और मुआवजे की मांग की
उन्नाव। पीपरखेड़ा क्षेत्र में भूमि विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा में है। यहां कई परिवारों ने सर्वे विभाग और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़ितों का दावा है कि करीब 34 वर्ष पूर्व खरीदी गई भूमि पर बने उनके मकानों और अन्य निर्माणों को 27 अगस्त 2024 को बिना पर्याप्त सुनवाई और अभिलेखों की समुचित जांच के बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। परिवारों के अनुसार उन्होंने गाटा संख्या 459 में वर्षों पहले विधिवत प्लॉट खरीदकर कब्जा प्राप्त किया था और लंबे समय से उसी भूमि पर निवास एवं निर्माण कार्य कर रहे थे। उनका कहना है कि समय-समय पर हुई प्रशासनिक जांचों में उनके कब्जे को वैध माना गया और कहीं भी भूमि को सरकारी या विवादित नहीं बताया गया। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि सर्वे विभाग द्वारा मूल भू-मानचित्र में बदलाव कर एक कथित फर्जी नक्शा तैयार किया गया, जिसके आधार पर उनकी भूमि को सरकारी जमीन दर्शा दिया गया। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए निर्माण गिरा दिया। उनका कहना है कि यदि अभिलेखों और पुराने रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। परिवारों का दावा है कि वर्ष 2016 से 2023 के बीच समाधान दिवस, आईजीआरएस और अन्य प्रशासनिक स्तरों पर हुई कई जांचों में उनके पक्ष में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। उन रिपोर्टों में न तो कब्जे को अवैध बताया गया और न ही निर्माण कार्य पर किसी प्रकार की रोक का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद अचानक की गई कार्रवाई ने उन्हें आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया है। पीड़ित परिवारों ने राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और संबंधित उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए। साथ ही कथित रूप से दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, हुए नुकसान की भरपाई और भूमि पर पुनर्निर्माण की अनुमति दिए जाने की मांग भी उठाई है। परिवारों का कहना है कि न्याय की उम्मीद में वे लगातार विभिन्न मंचों पर अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की अपील की है।