दो पासपोर्ट, अलग जन्मतिथि... : कूटरचित अभिलेख से धोखाधड़ी का आरोप
Mon, Sep 14, 2026
एक में 1968 तो दूसरे में 1986 की जन्मतिथि दर्ज, किला चौकी प्रभारी की तहरीर पर रिपोर्ट
उन्नाव। एक ही व्यक्ति के नाम से जारी दो पासपोर्ट में अलग-अलग जन्मतिथि, पिता का नाम और पता दर्ज होने का मामला सामने आया है। जिला पासपोर्ट अधिकारी और प्रभारी एलआईयू की आख्या के आधार पर किला चौकी प्रभारी उग्रसेन सिंह की तहरीर पर कोतवाली सदर में मोहम्मद रफीक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस ने अब दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। मामला अनवार नगर निवासी मोहम्मद रफीक से जुड़ा है। पासपोर्ट विभाग की ओर से पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक उसके नाम से एक पासपोर्ट 19 अप्रैल 2015 को जारी हुआ था। इसमें रफीक के पिता का नाम मोहम्मद सगीर, पता 160 शेखवाड़ा और जन्मतिथि 15 जुलाई 1968 दर्ज है। इसके करीब नौ साल बाद चार अक्तूबर 2024 को मोहम्मद रफीक के नाम से दूसरा पासपोर्ट जारी हुआ। इस दस्तावेज में पिता का नाम भग्गा, पता 38/8 अनवार नगर और जन्मतिथि 15 जुलाई 1986 दर्ज है। यानी दोनों पासपोर्ट में जन्मतिथि में 18 साल का अंतर है। दोनों दस्तावेजों में मां का नाम समान बताया गया है।
दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान पासपोर्ट के साथ लगाए गए अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। पुलिस को दी गई रिपोर्ट में आधार कार्ड और वोटर आईडी समेत अन्य अभिलेखों को कूटरचित तरीके से तैयार कर इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इसे पासपोर्ट बनवाने के दौरान गलत जानकारी और दस्तावेज देने का मामला माना है।
पासपोर्ट विभाग की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
जिला पासपोर्ट अधिकारी और एलआईयू की ओर से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के बाद पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था। इसके साथ पासपोर्ट से संबंधित फाइल, पासपोर्ट कार्यालय की रिपोर्ट और आधार कार्ड की प्रति समेत अन्य दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कोतवाली सदर में पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1) के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पुलिस अब करेगी दस्तावेजों का मिलान
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों पासपोर्ट बनवाने के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे और उनमें अलग-अलग जानकारी कैसे दर्ज हुई। पुलिस संबंधित अभिलेखों का मिलान करने के साथ मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।
गबन : कंपनी कर्मचारी पर सात लाख रुपये के हड़पने का आरोप
Sun, Sep 13, 2026
फर्जी गेट पास बनाकर ग्राहकों की गाड़ियां रिलीज कराने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर सदर कोतवाली में रिपोर्ट
उन्नाव। शहर के कानपुर-लखनऊ राजमार्ग स्थित एक ऑटोमोबाइल कंपनी में करीब सात लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। कंपनी के जनरल मैनेजर ने सर्विस एडवाइजर पर फर्जी गेट पास तैयार कर ग्राहकों की गाड़ियां रिलीज कराने और रकम अपने खाते में लेने का आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश पर सदर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कानपुर निवासी कंपनी के जनरल मैनेजर अंकित बाजपेई ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके साथ शिवम यादव सर्विस एडवाइजर के पद पर काम करता था। आरोप है कि शिवम ने कंपनी के ग्राहकों के फर्जी गेट पास बनाए और उनसे नगद रुपये लेने के साथ कुछ रकम अपने एसबीआई खाते में जमा कराई। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ग्राहकों की गाड़ियां रिलीज कर दीं। तहरीर के मुताबिक 10 जून 2026 को ग्राहक अतुल कुमार की गाड़ी संख्या यूपी 35 बीडब्ल्यू 7007 का सीरियल नंबर 2537 वाला गेट पास कूटरचित तरीके से तैयार कर गाड़ी निकलवा दी गई। कंपनी अधिकारियों से मामले को छिपाकर यह प्रक्रिया पूरी करने का आरोप है। बाद में जांच में करीब डेढ़ साल के दौरान कुल 7,07,993 रुपये के गबन की बात सामने आने का दावा किया गया। जनरल मैनेजर के अनुसार उन्होंने आरोपी की करतूत पकड़ने के बाद पुलिस को सूचना दी थी। आरोप है कि पुलिस शिवम को पकड़कर ले गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को पंजीकृत डाक से प्रार्थना पत्र भेजा गया और आईजीआरएस के माध्यम से भी शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया। न्यायालय के आदेश पर अब सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जमीन के विवाद में मारपीट : कोर्ट के आदेश पर पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
Sun, Sep 13, 2026
दीवार तोड़ने, मारपीट और महिला से अभद्रता का आरोप, जमीन पर कब्जे को लेकर हुआ था विवाद
उन्नाव। फतेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र के जमुनिहा कच्छ गांव में जमीन पर कब्जे को लेकर हुए विवाद में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने निर्माणाधीन दीवार तोड़ने के साथ उसके और परिजनों के साथ मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंची उसकी पत्नी से भी अभद्रता करने का आरोप लगाया है। गांव निवासी विनय कुमार ने न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि गांव की भूमि संख्या 152 राजस्व अभिलेखों में बंजर दर्ज है। ग्रामीण लंबे समय से इस जमीन पर घूरा डालते और जानवर बांधते आ रहे हैं। आरोप है कि गुड्डू और सुभाष आदि ने करीब पांच बिसुवा जमीन पर घेराबंदी कर कब्जा कर रखा है। विनय के अनुसार वर्ष 2019 में उसके पिता रामकृष्ण ने अपने घूरे की जमीन को सुरक्षित करने के लिए दक्षिण और पश्चिम दिशा में दीवार बनवाई थी। आरोप है कि नौ जून 2026 को विनय उक्त भूखंड के उत्तर दिशा में दीवार बनवा रहा था। इसी दौरान गुड्डू, सुभाष, तुलसी और रेखा लाठी-डंडे व कुल्हाड़ी लेकर पहुंच गए और गाली-गलौज करते हुए निर्माणाधीन दीवार तोड़ने लगे। विरोध करने पर विनय, उसके पिता रामकृष्ण और भाई शिवम के साथ मारपीट करने का आरोप है। विनय ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी सुशीला देवी बीच-बचाव करने पहुंची तो गुड्डू ने उसके साथ अभद्रता की और कपड़े उतारने की धमकी दी। शोर होने पर किसी ने 112 पर सूचना दी। पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई और निरोधात्मक कार्रवाई की गई। प्रार्थनापत्र में विनय ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान रामू के पास तमंचा था और उसने गोली मारने की धमकी दी। मारपीट में उसे, उसके पिता और भाई को चोटें आईं, लेकिन पुलिस ने मेडिकल नहीं कराया और उसकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया। आरोप है कि इसके बजाय दूसरे पक्ष ने उसी दिन उसके और परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।विनय के मुताबिक उसने 28 जुलाई को एसपी से शिकायत की और व्यक्तिगत रूप से भी मिला। एसपी के स्तर से थाने में रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए गए, लेकिन 29 जुलाई को थाने पहुंचने पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उसने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 11 अगस्त को गुड्डू, रामू, सुभाष, तुलसी और रेखा के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।