औचक निरीक्षण में बंद मिला चकबंदी कार्यालय : स्टाफ पर गिरी गाज
Sat, Dec 27, 2025
निगोही सहायक चकबंदी कार्यालय बंद मिलने पर कार्रवाई, डीएम को भेजी गई रिपोर्ट
उन्नाव। सरकारी दफ्तरों में समय पालन और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार को डिप्टी कलेक्टर एवं चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी रामदेव निषाद ने ब्लॉक सफीपुर क्षेत्र के निगोही स्थित सहायक चकबंदी कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक कार्यालय का मुख्य गेट बंद मिला और ताले लटके पाए गए। मौके पर न तो सहायक चकबंदी अधिकारी मौजूद थे और न ही कोई कर्मचारी। अचानक हुए इस निरीक्षण से विभागीय लापरवाही उजागर हो गई। कार्यालय बंद मिलने पर डिप्टी कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए सहायक चकबंदी अधिकारी राजेश कुमार सहित पूरे स्टाफ का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए। साथ ही सभी से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया गया है कि कार्यालय समय पर क्यों नहीं खोला गया और कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित क्यों पाए गए।निरीक्षण के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने भी बताया कि अक्सर कार्यालय देर से खुलता है या कई बार कर्मचारी समय से नहीं आते, जिससे फरियादियों को बेवजह चक्कर काटने पड़ते हैं। किसानों और आम लोगों को चकबंदी से जुड़े मामलों में परेशानी उठानी पड़ती है। डिप्टी कलेक्टर रामदेव निषाद ने साफ निर्देश दिए कि कार्यालय निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से खोला जाए और सभी अधिकारी व कर्मचारी अपने पदीय दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई गई तो और सख्त कार्रवाई की जाएगी।मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर इस कार्रवाई के बाद अन्य कार्यालयों में भी हड़कंप का माहौल है और समय पालन को लेकर कर्मचारियों में सतर्कता देखी जा रही है।
जीरो डिस्चार्ज का सपना अधूरा : हर साल माघ मेले में चर्म उद्योग को उठाना पड़ रहा नुकसान
Sat, Dec 27, 2025
111 करोड़ की योजना वर्षों से लटकी, मार्च 2026 तक बढ़ी समय सीमा
उन्नाव। बंथर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का अपग्रेड समय पर पूरा न होना जिले के चर्म उद्योग के लिए लगातार संकट बनता जा रहा है। जीरो डिस्चार्ज व्यवस्था लागू न हो पाने के कारण हर साल माघ मेले के दौरान टेनरियों पर पानी बहाने की पाबंदी लगाई जाती है। इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। 46 दिन की अवधि में 24 दिन तक टेनरियों को संचालन सीमित रखना होगा, लेकिन उद्योग जगत का कहना है कि व्यावहारिक रूप से इसका असर पूरे डेढ़ महीने तक पड़ेगा। चर्म उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि यदि सीईटीपी का अपग्रेड तय समय पर पूरा हो गया होता तो न तो उत्पादन रोकना पड़ता और न ही करोड़ों के नुकसान का सामना करना पड़ता। मौजूदा स्थिति में बंथर और दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र की करीब 40 छोटी-बड़ी टेनरियों का लगभग पांच करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। इससे न सिर्फ उद्योग बल्कि इससे जुड़े सैकड़ों श्रमिकों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। दरअसल वर्ष 2017 में बंथर और दही चौकी स्थित सीईटीपी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के तय मानकों पर खरे नहीं उतर पाए थे। इसके बाद इन्हें आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की योजना तैयार की गई। बंथर सीईटीपी को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्रणाली पर अपग्रेड करने के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) परियोजना के तहत केंद्र सरकार ने 111 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दी। इस परियोजना में उद्योगों से जुड़े उद्यमियों की भी अहम हिस्सेदारी है और उन्हें कुल लागत का करीब 25 प्रतिशत, यानी लगभग 27 करोड़ रुपये का योगदान देना है। सीईटीपी के अपग्रेड का काम सितंबर 2022 में शुरू हुआ था और इसे फरवरी 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन तय समय सीमा निकल जाने के बावजूद काम अधूरा है। कभी श्रमिकों की कमी तो कभी मशीनों और जरूरी सामग्री की आपूर्ति में देरी के चलते परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ती रही। अब एक बार फिर समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी गई है, जिससे उद्यमियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। चर्म उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर के सचिव मो. ताज आलम का कहना है कि चमड़ा बनाने की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है। टेनिंग की प्रक्रिया पूरी होने में 30 से 40 दिन का समय लगता है और इसे बीच में रोकना संभव नहीं होता। यदि प्रक्रिया अधूरी रह जाए तो चमड़े की गुणवत्ता खराब हो जाती है और पूरा माल बेकार हो सकता है। इसी वजह से 24 दिन की पाबंदी को व्यवहारिक रूप से पूरे डेढ़ महीने की पाबंदी माना जाता है। जब तक टेनरियों को पूरी तरह संचालन की अनुमति नहीं मिलती, तब तक उत्पादन ठप ही रहता है। सीईटीपी के अपग्रेड के बाद यहां अत्याधुनिक तकनीक के उपकरण लगाए जाने हैं। इनसे ट्रीटमेंट के बाद निकलने वाले पानी से क्रोमियम, फ्लोराइड, केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी), पीएच, बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और सस्पेंडेड सॉलिड जैसे प्रदूषक तत्व अलग किए जा सकेंगे। इससे एक ओर गंगा नदी में जाने वाला प्रदूषण कम होगा, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को बार-बार पानी रोकने की मजबूरी से भी राहत मिलेगी।
सीईटीपी प्रबंधन का कहना है कि काम लगातार जारी है। जीएम सीईटीपी रितुराज साहू के अनुसार ट्रीटमेंट और प्यूरिफिकेशन यूनिट में आधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि मशीनों की आपूर्ति और श्रमिकों की उपलब्धता को लेकर कुछ दिक्कतें आईं, जिससे काम प्रभावित हुआ, लेकिन अब मार्च 2026 की समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा कर लिया जाएगा। फिलहाल हालात यह हैं कि सीईटीपी के अधूरे अपग्रेड का खामियाजा हर साल चर्म उद्योग को भुगतना पड़ रहा है। उद्यमियों को उम्मीद है कि यदि इस बार तय समय पर काम पूरा हो गया तो आने वाले वर्षों में माघ मेले और अन्य अवसरों पर उत्पादन रोकने की समस्या से निजात मिलेगी और उन्नाव का चर्म उद्योग फिर से स्थिर रफ्तार पकड़ सकेगा।
मतदाता सूची की बड़ी सफाई : 4.06 लाख मतदाताओं के नाम कटने तय
Fri, Dec 26, 2025
शिफ्ट हुए, दिवंगत और डुप्लीकेट नामों पर कार्रवाई, प्रशासन ने जारी किए आंकड़े
उन्नाव। जिले में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) शुक्रवार को अपने अंतिम चरण में पहुंच गया। चुनाव आयोग के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में जिले की पूरी मतदाता सूची की घर-घर जाकर जांच की गई। प्रशासन के मुताबिक उन्नाव में एसआईआर का कार्य शत प्रतिशत पूरा कर लिया गया है, लेकिन इसके नतीजे काफी अहम और चौंकाने वाले सामने आए हैं। इस अभियान में सामने आया है कि जिले के कुल 23 लाख 25 हजार 53 मतदाताओं में से 4 लाख 6 हजार 776 मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। ये वे मतदाता हैं जो या तो लंबे समय से अपने पते पर नहीं मिले, स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, दिवंगत हो चुके हैं या फिर जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं। जांच के दौरान सबसे अधिक संख्या उन मतदाताओं की रही जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके हैं। ऐसे मतदाताओं की संख्या 1 लाख 94 हजार 212 बताई गई है। इसके अलावा 85 हजार 530 मतदाता ऐसे हैं जो अभियान के दौरान अपने पते पर खोजे ही नहीं जा सके। वहीं 81 हजार 738 मतदाता दिवंगत पाए गए। करीब 40 हजार 810 ऐसे मतदाता भी मिले जिनके नाम एक से अधिक जगहों की मतदाता सूची में दर्ज हैं। अन्य विभिन्न कारणों से 4 हजार 486 मतदाताओं को भी सूची से अलग किया गया है। अभियान के दौरान एक और बड़ी समस्या सामने आई है। जिले में 3 लाख 4 हजार 134 मतदाता ऐसे पाए गए हैं जिनके माता-पिता के नामों की मैपिंग वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सकी है। ऐसे मामलों में चुनाव आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं। इन मतदाताओं को अब अपना नाम मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए आयोग द्वारा तय 13 में से कोई एक वैध प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। उपजिला निर्वाचन अधिकारी एवं एडीएम वित्त एवं राजस्व सुशील कुमार गोड ने बताया कि एसआईआर अभियान के तहत सभी बूथ लेवल अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी गंभीरता से काम किया है। उन्होंने बताया कि मैपिंग न हो पाने वाले मतदाताओं की सूची तैयार कर ली गई है और आगे की कार्रवाई चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी आशुतोष मिश्रा ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम 2003 की सूची से मेल नहीं खा पाए हैं, उन्हें 31 दिसंबर के बाद निर्धारित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि तय समय सीमा में प्रमाण नहीं दिया गया तो उनके नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। अभियान के दौरान यह भी सामने आया कि अब तक वितरित किए गए गणना फार्मों में से 7 हजार 386 फार्म ऐसे हैं जो अभी तक बीएलओ के पास वापस जमा नहीं हो सके हैं। प्रशासन का कहना है कि इन फार्मों को लेकर भी अंतिम स्तर पर समीक्षा की जा रही है। एसआईआर अभियान के बाद जिले की मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव तय माने जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इस पूरी कवायद का मकसद मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आने वाले चुनावों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे।