: ऑपरेशन लंगड़ा का खौफ, अपराधी ने थाने पहुंचकर किया सरेंडर
Sat, Aug 2, 2025
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव: यूपी के उन्नाव में अपराधियों के अंदर आपरेशन लंगड़ा का खौफ साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। महिला के साथ टप्पेबाजी के मामलें में वांछित चल रहे शातिर बदमाश ने सदर कोतवाली में पहुंचकर सरेंडर किया है। हाथ में तख्ती लेकर गोली न मारनें की गुहार लगाते हुए गुनाहों से तौबा की। आरोपी उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के गदरपुर थाना क्षेत्र के ठंडा नाला, गूलरभोज का रहने वाला है। बता दें कि जुलाई माह में इन्द्रानगर मोहल्ले की एक महिला से कुछ अज्ञात युवकों ने टप्पेबाजी कर सोने-चांदी के जेवरात ठग लिए थे। महिला की शिकायत के बाद से कोतवाली पुलिस स्वॉट और सर्विलांस टीम बनाकर अभियुक्तों की तलाश में जुटी हुई थी। इब्राहिम ने ऑपरेशन लंगड़ा के खौफ के चलते कोतवाली पुलिस के सामने सरेंडर करते हुए माफी मांगी है।
दो दिन पूर्व मुठभेड़ में दो टप्पेबाजों की हुई थी गिरफ्तारी
उन्नाव पुलिस का ऑपरेशन लंगड़ा जारी है। इसी क्रम में शहर कोतवाल अवनीश सिंह ने बताया कि 17 जुलाई को सदर कोतवाली क्षेत्र के इंदिरा नगर निवासी महिला ने अज्ञात टप्पेबाजों के खिलाफ जेवर ले जाने का मुकदमा दर्ज कराया था। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी। गुरुवार को स्वॉट, सर्विलांस और सदर कोतवाली पुलिस ने मुठभेड़ में गैंग के लईक और महबूब को गिरफ्तार किया था। जिसमें इब्राहिम मौके से फरार होने में सफल रहा था। अभियुक्तों के पास से कान के झाला, एक अंगूठी पीले धातु की बरामद हुआ है। सदर कोतवाली प्रभारी अवनीश सिंह ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
: आरोप: बिजली चेकिंग के नाम पर हो रही अवैध वसूली
Fri, Aug 1, 2025
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान✍️
उन्नाव: शहर में चेकिंग के नाम पर बिजली विभाग के कर्मचारी क्षेत्र के उपभोक्ताओं का उत्पीड़न करने का मामला सामने आया हैं। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि आए दिन रात हो या दिन विभाग की टीम एफआईआर का डर दिखाकर रुपये मांगे जा रहे हैं। लोगों ने बताया कि पिछले कई दिनों से रात के समय बिजली कर्मचारी दादामियां चौराहा, गद्दियाना, कंजी, ऊंटसार, कहारों का अड्डा मोहल्लों में पहुंचकर चेकिंग कर रहे हैं। चेकिंग के नाम पर मीटर और केबल की जांच करते हैं। केबल कटा हुआ मिलने या फिर मीटर में गड़बड़ी बताकर रुपये की डिमांड करते हैं। विरोध करने पर बिजली चोरी के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने की धमकी देते हैं।
विभाग के रवैये को लेकर उपभोक्ताओं में आक्रोश पनप रहा है।पिछले एक दो महीने से शहर में बिजली चेकिंग अभियान चल रहा है। विभागीय अधिकारी प्राइवेट कर्मियों को लेकर बिजली चेकिंग की वीडियोग्राफी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अगर अधिक भार होता है, तो उपभोक्ता से अवैध वसूली को सीधे डीलिंग हो रही है। रुपये न देने पर मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। भय के कारण उपभोक्ता रुपये देने को तैयार हो जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर शोषित उपभोक्ताओं ने बताया कि अधिक भार की बात कहकर विद्युतकर्मियों ने अवैध वसूली में रुपये की मांग की। जब इंकार किया तो मुकदमे की धमकी दी। मजबूरन रुपये देने पड़े। नियमानुसार, यदि उपभोक्ता अधिक भार का प्रयोग कर रहा है तो पेनल्टी लगनी चाहिए, ताकि राजस्व लाभ हो। लेकिन विभागीय अधिकारी, कर्मचारी के साथ मिलकर जेब भरने में लगे हैं। विधुत विभाग की कार्यशैली से लोगों में नाराज़गी दिख रही है। इस संबंध में क्षेत्रीय सभासद मेराजउद्दीन का कहना है कि बिजली विभाग की टीम आए दिन वार्ड में चेकिंग के लिए धमक पड़ते है। और वार्डवासियों के साथ चेकिंग के नाम पर उगाही कर रहे है। उन्होनें कहा कि विधुत विभाग चेकिंग करने क्षेत्र में आए उनका पूरा सहयोग किया जाएगा लेकिन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधी के नाते वार्डवासियों के साथ उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नही करेंगें।
: उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को बंद करनेके मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे AAP सांसद संजय सिंह!
Wed, Jul 30, 2025
उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को बंद करनेके मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे AAP सांसद संजय सिंह
नई दिल्ली/यूपी : दरअसल यूपी में योगी सरकार द्वारा बंद किए जा रहे सरकारी स्कूलों का मुद्दा इन दिनों गरमाया हुआ है, इस मामले में आम आदमी पार्टी भी फैसले का विरोध कर रही है, इस बीच आप सांसद संजय सिंह ने यूपी सरकार द्वारा 105 सरकारी प्राथमिक स्कूलों को बंद करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, इस याचिका में उन्होंने यूपी सरकार के फैसले को दी चुनौती हैकोर्ट में दायर याचिका में सांसद ने यूपी सरकार के फैसले को मनमाना, असंवैधानिक और बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के विपरीत बताया हैदरअसल यूपी सरकार ने कम नामांकन वाले 105 प्राथमिक स्कूलों को बंद करने और तीन किलोमीटर के दायरे में नजदीकी स्कूलों में विलय करने का निर्णय लिया है, इसके खिलाफ वकील श्रीराम पी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है16 जून के एक फैसले और उसके बाद 24 जून के आदेश के तहत सरकार ने ऐसे 105 विद्यालयों को बंद करने की घोषणा की यह फैसला तब लिया गया, जब सरकार ने पाया कि इन स्कूलों में नामांकन कम है. उसके बाद सरकार ने इन स्कूलों को पास के नजदीकी स्कूलों के साथ जोड़ने का फैसला किया याचिका में तर्क दिया गया है कि इस कार्रवाई से राज्य भर के कई बच्चों की शिक्षा तक पहुंच पर पहले ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है याचिकाकर्ता ने कहा कि कई पीड़ित माता-पिता और सामुदायिक हितधारकों ने उनसे संपर्क किया है जिनके बच्चे इस आदेश से प्रभावित हुए हैं याचिका में सुप्रीम कोर्ट से इस आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गयायाचिका में सुप्रीम कोर्च से यह आग्रह किया गया है कि उत्तर प्रदेश नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियम, 2011 के नियम 4(2) का अनुपालन किए बिना 1 किलोमीटर की निर्धारित सीमा से परे कार्यरत सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को जोड़ने या विलय करने की नीति असंवैधानिक, मनमानी हैयाचिका में तर्क दिया गया कि केवल कम छात्र नामांकन के आधार पर सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को विलय या जोड़ने की कार्रवाई RTI अधिनियम, 2009 और उत्तर प्रदेश बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 (यूपी आरटीई नियम) के विरुद्ध है!