Fri 19 Jun 2026

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: हाईकोर्ट ने स्कूलों के मर्जर के खिलाफ एक और याचिका खारिज, यूपी सरकार के शिक्षा सुधारों को मिली न्यायिक मान्यता!

हाईकोर्ट ने स्कूलों के मर्जर के खिलाफ एक और याचिका खारिज, यूपी सरकार के शिक्षा सुधारों को मिली न्यायिक मान्यता!

    उत्तर प्रदेश लखनऊ : दरअसल यूपी के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर अभियान (छोटे स्कूलों का विलय) को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक बार फिर संवैधानिक और जनहित में ठहराया है, गुरुवार को न्यायमूर्ति AR मसूदी और न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक नई जनहित याचिका को खारिज कर दिया, याचिका खारिज होने से योगी सरकार को बड़ी न्यायिक राहत मिली है   आपको बता दें इस नीति के तहत जिन विद्यालयों में 50 से कम छात्र हैं, उन्हें पास के स्कूलों से जोड़ा जा रहा है. शिक्षकों की संख्या, संसाधन और अधोसंरचना को एकीकृत किया जा रहा है ताकि उनका बेहतर उपयोग हो सके. इस अभियान का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना, ड्रॉपआउट दर कम करना और बच्चों को स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है खंडपीठ ने खारिज की नई जनहित याचिका न्यायमूर्ति AR मसूदी और न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की खंडपीठ ने गुरुवार को अधिवक्ता ज्योति राजपूत की ओर से दाखिल जनहित याचिका को खारिज कर दिया. इस याचिका में 16 जून 2025 को जारी विद्यालयों के समेकन संबंधी सरकारी आदेश को चुनौती दी गई थी और साथ ही दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई थी. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया और मुख्य स्थाई अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने दलील दी कि इसी विषय पर 7 जुलाई 2025 को एकल पीठ की ओर से सीतापुर के 51 बच्चों की याचिका पर पहले ही विस्तृत निर्णय दिया जा चुका है. कोर्ट ने इसी आधार पर नई जनहित याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया.   बता दें कि इससे पहले 7 जुलाई को न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि सरकार का यह कदम अनुच्छेद 21A का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराना है, कोर्ट ने यह भी माना था कि छोटे स्कूलों में संसाधन बिखरे हुए थे, जिससे बच्चों को अध्यापक, पुस्तकालय, खेल-कूद और डिजिटल सुविधा जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जिन विद्यालयों में 50 से कम छात्र हैं या जो छात्रविहीन हैं, उन्हें नजदीकी स्कूलों से जोड़ा जा रहा है, इसका मुख्य उद्देश्य सभी छात्रों को एकीकृत रूप से बेहतर शिक्षण सुविधा प्रदान करना है, कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए शिक्षा सुधारों की दिशा में इसे संविधान सम्मत और दूरदर्शी नीति करार दिया!

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