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नौकरी के नाम पर सात अभ्यर्थियों से 46 लाख की ठगी : चार के खिलाफ केस

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Fri, Nov 6, 2026
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पांच-पांच लाख रुपये लेकर टालते रहे नियुक्ति की तारीख, शिकायत पर दर्ज गंगाघाट थाने में हुई रिपोर्ट

उन्नाव। शिक्षा आयोग में सरकारी नौकरी पाने की चाहत सात अभ्यर्थियों को भारी पड़ गई। लिपिक और प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति दिलाने का झांसा देकर सात लोगों से 46 लाख रुपये वसूलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कानपुर के दो लोगों ने अपने एक परिचित को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज का संयुक्त सचिव बताकर अभ्यर्थियों को भरोसे में लिया। राज्यपाल कोटे से सीधी भर्ती का दावा किया गया। अभ्यर्थियों से दस्तावेज जमा कराने के साथ शिक्षा निदेशालय, लखनऊ ले जाकर आवेदन पत्रों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। पांच सितंबर को लोक भवन में मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र दिलाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन तारीख लगातार टलती रही। आखिरकार शुक्लागंज के एक अभ्यर्थी की तहरीर पर गंगाघाट पुलिस ने चार नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की है। गांधी नगर, शुक्लागंज निवासी अंकित सिंह पुत्र सत्येन्द्र सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी मुलाकात शरद अवस्थी निवासी नेहरू नगर, कानपुर से हुई थी। शरद ने उनकी पहचान फजलगंज निवासी नीरज मिश्रा से कराई। आरोप है कि नीरज ने अपने मामा अरविंद नारायण शुक्ला उर्फ गोविंद मिश्रा को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज में संयुक्त सचिव बताया। साथ ही दावा किया कि उन्होंने खुद नीरज की चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्ति कराई है। इसी भरोसे पर अभ्यर्थियों को लिपिक और चपरासी के पदों पर राज्यपाल कोटे से सीधी भर्ती कराने का प्रस्ताव दिया गया।

101 प्रतिशत नौकरी की गारंटी का दावा

तहरीर के मुताबिक, अभ्यर्थियों को बताया गया कि भर्ती के लिए हलफनामा, जिला अस्पताल का मेडिकल प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट समेत अन्य दस्तावेज जमा करने होंगे। पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया भी बताई गई। प्रति अभ्यर्थी 10 लाख रुपये देने की बात कही गई, जिसमें पांच लाख रुपये नियुक्ति पत्र मिलने से पहले और बाकी पांच लाख वेतन शुरू होने के बाद देने का आश्वासन था। अंकित का आरोप है कि उन्हें और अन्य अभ्यर्थियों को लिपिक पद पर 101 प्रतिशत नियुक्ति कराने का भरोसा दिया गया।

शिक्षा निदेशालय में कराए हस्ताक्षर, लोक भवन का दिया भरोसा

अंकित के अनुसार, शरद अवस्थी उन्हें और अन्य अभ्यर्थियों को शिक्षा निदेशालय, लखनऊ ले गए। वहां अरविंद नारायण शुक्ला उर्फ गोविंद मिश्रा के साथ ज्ञानेन्द्र दुबे भी मौजूद थे। ज्ञानेन्द्र को संयुक्त सचिव का निजी सचिव बताया गया। आरोप है कि वहां अभ्यर्थियों से लिपिक पद के आवेदन पत्रों पर हस्ताक्षर कराए गए और पांच सितंबर 2026 को लोक भवन में मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र वितरित कराने की बात कही गई। हालांकि, तय तारीख आने के बाद भी नियुक्ति पत्र नहीं मिले और तारीख लगातार आगे बढ़ती रही।

किससे कितनी रकम लेने का आरोप

अंकित सिंह की तहरीर के अनुसार, अप्रैल में सात अभ्यर्थियों ने कुल 46 लाख रुपये नकद दिए थे। इनमें अंकित सिंह, लेखनी शुक्ला, वनीशा त्रिपाठी, अक्षय पांडेय और उत्तम द्विवेदी से पांच-पांच लाख रुपये, शिवम मिश्रा से सात लाख रुपये और चित्रा शुक्ला से 14 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है। चित्रा शुक्ला से पांच लाख रुपये लिपिक और नौ लाख रुपये प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति के नाम पर लेने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पूरी रकम चित्रा शुक्ला के पिता प्रभात शुक्ला के विद्यालय में दी गई थी और भुगतान का वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध है।

चार नामजद, धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज

गंगाघाट पुलिस ने गांधी नगर, शुक्लागंज निवासी अंकित सिंह की तहरीर पर शरद अवस्थी निवासी नेहरू नगर और नीरज मिश्रा निवासी फजलगंज, कानपुर नगर के अलावा अरविंद नारायण शुक्ला उर्फ गोविंद मिश्रा और ज्ञानेन्द्र दुबे निवासी गंगाघाट, उन्नाव के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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