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बरेली में बारातघर पर चला बुलडोजर : सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिला तात्कालिक ब्रेक!

THE LUCKNOW TIMES

Thu, Dec 4, 2025
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अवैध निर्माण बताकर तोड़फोड़ शुरू, मालिकों ने लगाया 'चुनिंदा कार्रवाई' का आरोप; शीर्ष अदालत ने दी एक हफ्ते की अंतरिम राहत

बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली के सूफी टोला इलाके में बुधवार को उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) की टीम ने दो बड़े और प्रतिष्ठित बारात घरों—ऐवान-ए-फरहत और गुड मैरिज हॉल—पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। हालांकि, कई घंटों तक चली तोड़फोड़ के बाद, अचानक सुप्रीम कोर्ट के एक तात्कालिक आदेश ने इस कार्रवाई पर न सिर्फ ब्रेक लगा दिया, बल्कि मालिकों को एक सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा भी प्रदान कर दी।

🚨 BDA की ताबड़तोड़ कार्रवाई

BDA की टीम ने बुलडोजर और पोकलैंड मशीनों के साथ सुबह ही सूफी टोला इलाके को छावनी में बदल दिया। दोनों बारात घरों के सामने के हिस्सों को तोड़ने का काम शुरू हुआ, जो कई घंटों तक चला।

भारी पुलिस बल: किसी भी विरोध या अप्रिय घटना को रोकने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

आवाजाही पर रोक: तोड़फोड़ वाले क्षेत्र और आसपास की गलियों को बैरिकेड लगाकर सील कर दिया गया था, जिससे सामान्य आवाजाही पूरी तरह रुक गई।

BDA के अधिकारियों ने दावा किया कि यह कार्रवाई अवैध निर्माण के खिलाफ नियमित अभियान का हिस्सा है

🗣️ मालिकों का सनसनीखेज आरोप: 'टारगेटेड एक्शन'

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान मैरिज हॉल के मालिकों और उनके परिवार के सदस्यों ने ज़ोरदार विरोध दर्ज कराया। उनका पक्ष चौंकाने वाले दावे प्रस्तुत करता है

चुनिंदा कार्रवाई का आरोप: मालिकों ने दावा किया कि प्रशासन की यह कार्रवाई चुनिंदा लोगों को निशाना बनाकर की जा रही है, जबकि शहर में कई अन्य अवैध निर्माण मौजूद हैं जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

वैधता और रोज़गार का दावा: बारात घरों को वैध निर्माण और रोज़गार से जुड़ा कारोबार बताते हुए मालिकों ने प्रशासन पर नियमों का समान रूप से पालन न करने का आरोप लगाया।

भावुक दृश्य: तोड़फोड़ के दौरान परिवार के कई सदस्य भावुक होकर रोते-बिलखते दिखाई दिए, जिसने मौके पर मौजूद लोगों की संवेदनाएं अपनी ओर खींची।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट से मिली तात्कालिक सुरक्षा

जब कार्रवाई अपने चरम पर थी, तभी बारात घर मालिकों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई।

शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया

ध्वस्तीकरण पर रोक: सुप्रीम कोर्ट ने इन बारात घरों पर तात्कालिक रूप से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगा दी।

अंतरिम सुरक्षा: याचिकाकर्ताओं को एक सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई है।

हाई कोर्ट जाने का निर्देश: अदालत ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपनी बात को विस्तृत रूप से हाई कोर्ट में रखें।

स्पष्ट निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हाई कोर्ट में सुनवाई होने तक उत्तर प्रदेश में इन याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

🛑 बुलडोजर लौटा, कार्रवाई थमी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति जैसे ही मौके पर मौजूद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को दिखाई गई, कार्रवाई तुरंत रोक दी गई। बुलडोजर और अन्य मशीनें वापस लौट गईं।

फिलहाल, मौके पर चल रही तोड़फोड़ रुक चुकी है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी जारी है। प्रभावित पक्ष ने न्यायिक राहत की इस लड़ाई को आगे भी जारी रखने की बात कही है, जबकि प्रशासन अपनी कार्रवाई को अवैध निर्माण के खिलाफ एक नियमित और निष्पक्ष अभियान बता रहा है।

यह मामला अब हाई कोर्ट के समक्ष जाएगा, जहां यह तय होगा कि ये निर्माण वैध हैं या अवैध, और क्या प्रशासन की कार्रवाई नियमों के दायरे में थी।

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