भटक गई मासूम : पुलिस की मुस्तैदी से एक घंटे में सुरक्षित मिली
Thu, Mar 19, 2026
मौके पर मौजूद लोगों ने भी पुलिस की मुस्तैदी की सराहना की
उन्नाव। जिला अस्पताल परिसर में बुधवार रात एक चार साल की बच्ची के अचानक लापता हो जाने से हड़कंप मच गया। हालांकि पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए बच्ची को महज एक घंटे के भीतर ही सकुशल ढूंढकर परिजनों को सौंप दिया गया। अस्पताल चौकी इंचार्ज अंजनी सिंह ने बताया कि संजीत गुप्ता निवासी गणेश गंज, स्टेशन रोड बांगरमऊ अपनी पत्नी गुड्डन गुप्ता के इलाज के लिए जिला अस्पताल आए हुए थे। उनकी पत्नी अस्पताल में भर्ती थीं। बुधवार रात करीब दस बजे संजीत अपनी चार साल की बेटी आरती गुप्ता के साथ अस्पताल परिसर में बैठे थे। इसी दौरान खेलते-खेलते आरती अचानक कहीं चली गई। काफी देर तक तलाश करने के बाद भी जब बच्ची का पता नहीं चला तो संजीत गुप्ता ने अस्पताल चौकी में सूचना दी। सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज अंजनी सिंह अपनी टीम के साथ सक्रिय हो गए और अस्पताल परिसर में सघन तलाश अभियान चलाया। पुलिस टीम ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद बच्ची को अस्पताल परिसर से ही सुरक्षित बरामद कर लिया। इसके बाद आरती को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। बच्ची के सुरक्षित मिलने पर परिजनों ने राहत की सांस ली और पुलिस टीम का आभार जताया। वहीं मौके पर मौजूद लोगों ने भी पुलिस की तत्परता और मुस्तैदी की सराहना की।
बंद फैक्टरी में ड्यूटी पर गार्ड की मौत : सर्पदंश से गई जान
Wed, Mar 18, 2026
दो दिन बाद मिला शव, पुलिस की पहल पर परिवार को प्रबंधन से मुआवजा मिला
उन्नाव। बंथर औद्योगिक क्षेत्र की एक बंद पड़ी फैक्टरी में तैनात बुजुर्ग सुरक्षा गार्ड की संदिग्ध हालात में मौत का मामला सामने आया है। बुधवार को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ कि उनकी मौत सांप के डंसने से हुई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है, वहीं पुलिस की पहल पर फैक्टरी प्रबंधन ने आश्रितों को सात लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है। भगौतीखेड़ा गांव निवासी 65 वर्षीय ब्रिजलाल यादव सोमवार रात रोज की तरह ड्यूटी पर गए थे, लेकिन अगले दिन दोपहर तक घर नहीं लौटे। परिजनों ने कई बार फोन मिलाया, पर मोबाइल बंद मिला। चिंता बढ़ने पर उनका बेटा रामकुमार फैक्टरी पहुंचा। वहां गेट अंदर से बंद था, जिससे शक और गहरा गया। आसपास के लोगों की मदद से बगल की फैक्टरी की छत पर चढ़कर अंदर झांका गया तो ब्रिजलाल का शव परिसर में पड़ा दिखा। यह दृश्य देखते ही परिवार के लोगों में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और मुआवजे की मांग को लेकर हंगामा शुरू हो गया। मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष बृजेश कुमार शुक्ल ने हालात संभाले और परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। पुलिस ने फैक्टरी प्रबंधन से संपर्क कर मामला सुलझाने की कोशिश की। देर शाम बातचीत के बाद प्रबंधन ने आश्रितों को सात लाख रुपये का चेक सौंपा, तब जाकर स्थिति सामान्य हुई। बुधवार को हुए पोस्टमार्टम में मौत की वजह साफ हो गई। रिपोर्ट में बताया गया कि ब्रिजलाल की जान जहरीले सांप के काटने से गई। फैक्टरी लंबे समय से बंद थी, जिससे परिसर में झाड़ियां और जंगली हालात बने हुए थे। आशंका है कि ड्यूटी के दौरान इसी बीच उन्हें सांप ने डस लिया। परिवार की हालत बेहद खराब है। रामकुमार ने बताया कि उनके पिता पहले होमगार्ड में थे और रिटायरमेंट के बाद परिवार चलाने के लिए गार्ड की नौकरी कर रहे थे। घर में तीन बेटियां अब भी अविवाहित हैं। पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है, ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी ब्रिजलाल पर ही थी। परिवार पर दुख का असर और भी गहरा इसलिए है क्योंकि घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। बेटी बबिता की शादी तय हो चुकी थी, 12 मार्च को गोद भराई की रस्म भी हो गई थी और 13 मई को बारात आनी थी। लेकिन अचानक हुई इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। थानाध्यक्ष बृजेश कुमार शुक्ल ने बताया कि फैक्टरी बंद होने के बावजूद प्रबंधन से बात कर परिजनों को आर्थिक मदद दिलाई गई है। फिलहाल आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
कार्रवाई : बिना काम भुगतान के मामलें में गिरी गाज, डिप्टी सीवीओ भी हटाए गए
Wed, Mar 18, 2026
विधान परिषद में मामला उठने के बाद तेज हुई कार्रवाई
अधूरे काम के बावजूद पूरा भुगतान, अन्य जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की तैयारी
उन्नाव। जिले में पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प के नाम पर खर्च किए गए सरकारी बजट में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है। जिलास्तरीय जांच में दोषी पाए गए डिप्टी सीवीओ डॉ. संजय चतुर्वेदी को शासन ने लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इस कार्रवाई को जांच रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।यह मामला पहले भी सुर्खियों में रहा है। 18 जनवरी को विधान परिषद में इस मुद्दे को उठाते हुए कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जताई गई थी। इसके बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हुई और अब क्रमवार कार्रवाई की जा रही है। दरअसल, मार्च 2025 में जिले के 16 ब्लॉकों में स्थित पशु चिकित्सालयों के मरम्मत और रंग-रोगन के लिए करीब 13.80 लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। उद्देश्य था कि अस्पतालों की स्थिति सुधरे और पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं मिलें। लेकिन जांच में सामने आया कि कई जगह काम पूरा होने से पहले ही भुगतान कर दिया गया। शहर के एक पशु चिकित्सालय में तो बिना कोई कार्य कराए ही करीब 90 हजार रुपये जारी कर दिए गए। वहीं सिकंदरपुर कर्ण, अचलगंज और सुमेरपुर क्षेत्रों में भी अधूरे कार्य पाए गए। कई स्थानों पर टाइल्स तक नहीं लगीं, लेकिन कागजों में पूरा काम दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। सिर्फ निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि सामान की खरीद में भी गंभीर अनियमितताएं मिलीं। जांच में पाया गया कि सामान्य उपयोग की वस्तुएं बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं। उदाहरण के तौर पर 30 रुपये की झाड़ू 300 रुपये में और 100 रुपये का डस्टर 1000 रुपये में खरीदा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी गौरांग राठी के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। इसमें जिला विकास अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता और कोषाधिकारी शामिल थे। समिति की रिपोर्ट में कई स्तरों पर लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ियों की पुष्टि हुई। जिलाधिकारी ने रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सीवीओ डॉ. महावीर सिंह, डिप्टी सीवीओ डॉ. संजय चतुर्वेदी और पशु चिकित्साधिकारी शरद शाक्य के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी थी। इनमें से तत्कालीन सीवीओ पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। डिप्टी सीवीओ पर कार्रवाई में देरी को लेकर एमएलसी डॉ. मान सिंह ने विधान परिषद में सवाल उठाया था। इसके बाद 17 मार्च 2026 को पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. मेमपाल सिंह ने आदेश जारी करते हुए डॉ. संजय चतुर्वेदी को लखनऊ निदेशालय से संबद्ध कर दिया। इस प्रकरण में सीवीओ कार्यालय की वरिष्ठ सहायक व प्रभारी अकाउंटेंट प्रीति श्रीवास्तव को नवंबर 2025 में ही निलंबित किया जा चुका है। वहीं, जांच में नाम आने के बाद पशु चिकित्साधिकारी शरद शाक्य पर भी जल्द कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।जिला पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई जिलाधिकारी द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है और शासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया जारी है। पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में निगरानी कितनी कमजोर है। बिना काम भुगतान, अधूरे निर्माण और खरीद में गड़बड़ी जैसे मामलों ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। इसके अलावा स्लाटरों मे भी पशु विभाग की निगरानी और मीट फैक्ट्रियों के संचालकों को लाभ पहुंचाने को लेकर भी सवाल उठते हुए आए है अब देखना होगा कि बाकी जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर किस तरह रोक लगाई जाती है।