पूर्व एलआईयू दारोगा ने खुद को मारी गोली : कानपुर ले जाते समय मौत
Mon, Aug 3, 2026
गोली की आवाज सुनकर कमरे में पहुंचे बेटे ने देखा खून से लथपथ पड़े थे पिता, पुलिस ने शुरू की जांच
उन्नाव। शहर के पीडी नगर मोहल्ले में रविवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस की एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) शाखा से रिटायर्ड दारोगा ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से खुद को गोली मार ली। गंभीर रूप से घायल हालत में परिजन उन्हें इलाज के लिए कानपुर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई और जांच शुरू कर दी। मूल रूप से कन्नौज जिले के गुरसहायगंज क्षेत्र के रउतामई गांव निवासी 65 वर्षीय रामजीत वर्ष 2021 में एलआईयू शाखा से सेवानिवृत्त हुए थे। वह काफी समय से अपने बेटे अभिषेक के साथ उन्नाव के पीडी नगर मोहल्ले में रह रहे थे। आसपास के लोगों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले पत्नी के निधन के बाद से वह अक्सर मानसिक तनाव में रहते थे। बेटे अभिषेक ने पुलिस को बताया कि रविवार रात करीब 10 बजे पिता ने परिवार के साथ खाना खाया और अपने कमरे में सोने चले गए। करीब डेढ़ घंटे बाद अचानक गोली चलने की तेज आवाज सुनाई दी। वह दौड़कर कमरे में पहुंचे तो पिता खून से लथपथ पड़े थे। तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां से कानपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई।पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से रामजीत की लाइसेंसी एकनाली बंदूक बरामद हुई है, जिसे कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। शुरुआती जानकारी में बेटे ने पुलिस को बताया है कि पिता डिप्रेशन में थे और इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया। घटना की जानकारी मिलते ही सीओ सिटी विनी सिंह और शहर कोतवाल चंद्रकांत मिश्र मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर परिवार के लोगों से पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि अभी प्रथम दृष्टया से मामला आत्महत्या का नजर आ रहा है, लेकिन हर पहलू को लेकर भी जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने लौटाई 121 लोगों की मुस्कान : 25 लाख के गुम मोबाइल मालिकों तक पहुंचे
Sun, Aug 2, 2026
जनवरी से अब तक 1.01 करोड़ रुपये के 488 मोबाइल बरामद
उन्नाव। मोबाइल गुम होने के बाद ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि अब वह कभी वापस नहीं मिलेगा। लेकिन उन्नाव पुलिस ने एक बार फिर इस धारणा को गलत साबित कर दिया। जनपद पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत 121 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को वापस सौंप दिए। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 25 लाख रुपये है। लंबे समय बाद अपना मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी और उन्होंने पुलिस टीम का आभार जताया। रविवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह ने मोबाइल स्वामियों को उनके फोन सौंपे। इस दौरान उन्होंने बताया कि मोबाइल पहचान पंजीकरण प्रणाली (सीईआईआर) के प्रभावी उपयोग और सर्विलांस टीम की तकनीकी निगरानी से गुम मोबाइलों की बरामदगी में लगातार सफलता मिल रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर जनपद के सभी थानों में मोबाइल गुम होने की शिकायतों को मोबाइल पहचान पंजीकरण प्रणाली (सीईआईआर) पर दर्ज कराया जा रहा है। इसके बाद सर्विलांस टीम मोबाइल की लोकेशन ट्रेस कर संबंधित थानों के सहयोग से उन्हें बरामद करती है। एसएसपी ने बताया कि अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी अखिलेश सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी शैलेन्द्र लाल के पर्यवेक्षण में सर्विलांस सेल और सभी थाना पुलिस की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक 488 मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपये है, बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए जा चुके हैं। इनमें केवल 2 अगस्त को ही 121 मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, इस बार बरामद मोबाइलों में सैमसंग (10), वीवो (33), ओप्पो (15), रियलमी (17), रेडमी (17), टेक्नो (10), वनप्लस (6), पोको (4), लावा (2), मोटोरोला (2), आईटेल (2), इनफिनिक्स (2), आईक्यूओ (1) और एचएमडी (1) कंपनी के स्मार्टफोन शामिल हैं। मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका खोया हुआ फोन दोबारा मिल पाएगा, लेकिन उन्नाव पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच के चलते उनका कीमती सामान वापस मिल गया।एसएसपी जय प्रकाश सिंह ने लोगों से अपील की कि मोबाइल गुम होने या चोरी होने पर तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दें और मोबाइल पहचान पंजीकरण प्रणाली (सीईआईआर) पर भी शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत दर्ज होने से मोबाइल बरामद होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और सर्विलांस की मदद से जनपद पुलिस अपराध नियंत्रण के साथ-साथ आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए भी लगातार काम कर रही है। आने वाले समय में भी गुम मोबाइलों की बरामदगी का अभियान इसी तरह जारी रहेगा।
चाइनीज मांझे के खिलाफ सड़क पर उतरी पुलिस : मोहल्लों में चलाया जागरूकता अभियान
Sun, Aug 2, 2026
सदर कोतवाली प्रभारी के निर्देश पर घर-घर पहुंची पुलिस टीम, मस्जिद के जरिए भी लोगों तक पहुंचाया सुरक्षा का संदेश
उन्नाव। शहर में चाइनीज मांझे से होने वाले हादसों की रोकथाम के लिए रविवार को सदर कोतवाली पुलिस ने व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। सदर कोतवाली प्रभारी चंद्रकांत मिश्र के निर्देश पर किला चौकी पुलिस टीम ने कैसरगंज, तालिब सरायं, दादामियां चौराहा समेत कई मोहल्लों में घर-घर पहुंचकर लोगों को प्रतिबंधित चाइनीज मांझे के नुकसान बताए और इसका इस्तेमाल न करने की अपील की। अभियान के दौरान पुलिस टीम ने छतों पर पतंग उड़ा रहे बच्चों और युवाओं से बातचीत की तथा उनके पास मौजूद मांझे की जांच की। जांच में किसी के पास भी प्रतिबंधित चाइनीज मांझा नहीं मिला। सभी के पास भारतीय मांझा पाया गया, जिस पर पुलिस ने संतोष जताया।पुलिस ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर नजर रखें और उन्हें ऐसे मांझे के इस्तेमाल से दूर रखें, जिससे किसी राहगीर, दोपहिया वाहन चालक या पक्षियों की जान जोखिम में पड़ सकती है। साथ ही बच्चों को पढ़ाई और अन्य सकारात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करने की सलाह दी गई। पुलिस की समझाइश के बाद बच्चों और युवाओं ने भविष्य में पतंगबाजी से दूरी बनाए रखने का आश्वासन भी दिया। अभियान के दौरान पुलिस टीम ने जामा मस्जिद पहुंचकर इमाम असलम मदनी से मुलाकात की और उनसे मस्जिद के माध्यम से चाइनीज मांझे के खतरों को लेकर लोगों को जागरूक करने का अनुरोध किया। पुलिस का कहना है कि सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से इस तरह के अभियान अधिक प्रभावी साबित होंगे। शहर कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने कहा कि चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके इस्तेमाल या बिक्री की सूचना मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लोगों से भी अपील की गई कि यदि कहीं चाइनीज मांझे की बिक्री या उपयोग की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।