सरेशाम महिला से चेन स्नैचिंग : तीन दिन बाद भी बदमाश पुलिस की पकड़ से दूर
Wed, Jul 29, 2026
23 सीसीटीवी फुटेज खंगाल चुकी पुलिस, पांच टीमें, स्वाट और सर्विलांस भी जांच में जुटी
उन्नाव। दही थाना क्षेत्र की आवास विकास कॉलोनी में सरेशाम महिला से हुई चेन स्नैचिंग की वारदात के तीन दिन बाद भी पुलिस बदमाशों तक नहीं पहुंच सकी है। हालांकि पुलिस लगातार सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच में जुटी है। उधर, घटना के बाद कॉलोनी के लोगों में अब भी दहशत का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्क से टहलकर घर लौट रही एक महिला को बाइक सवार दो बदमाशों ने रास्ते में रोककर गले से सोने की चेन झपट ली और कुछ ही सेकंड में मौके से फरार हो गए। सरेशाम हुई इस घटना के बाद कॉलोनी के लोगों में दहशत का माहौल है। आवास विकास कॉलोनी निवासी अर्चना दुबे, पत्नी स्वर्गीय दिनेश चंद्र दुबे, रविवार शाम करीब 6:45 बजे चंद्रशेखर आजाद पार्क से टहलकर अपने घर लौट रही थीं। जैसे ही वह घर के पास पहुंचीं, तभी बाइक पर आए दो अज्ञात युवकों ने उन्हें रोक लिया। महिला कुछ समझ पातीं, इससे पहले बदमाश उनके गले से सोने की चेन झपटकर तेज रफ्तार से फरार हो गए। घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद लोग भी बदमाशों को पकड़ नहीं सके। पीड़िता ने घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी। इसके बाद दही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और महिला की तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
सीसीटीवी कैमरों के सहारे बदमाशों तक पहुंचने की कोशिश
पुलिस ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। अब तक 23 कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी जा चुकी है। पुलिस बदमाशों के आने-जाने के रास्ते और उनकी पहचान से जुड़े सुराग जुटाने में लगी है। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान कुछ अहम इनपुट मिले हैं और पुलिस संदिग्धों तक पहुंचने के करीब है।
एसपी ने दिखाई सख्ती, कई टीमें लगाईं
घटना को गंभीरता से लेते हुए एसपी जयप्रकाश सिंह ने दही थाना पुलिस से नाराजगी जताई और जल्द से जल्द घटना के खुलासे के निर्देश दिए हैं। मामले के खुलासे के लिए दही थाना पुलिस की पांच टीमें लगातार काम कर रही हैं। इसके अलावा स्वाट और सर्विलांस टीम को भी जांच में लगाया गया है, ताकि बदमाशों को जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
इलाके के लोगों में बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस इलाके में पुलिस की नियमित पिकेट रहती है, वहीं सरेशाम इस तरह की वारदात होना चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि अगर भीड़भाड़ वाले इलाके में महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं, तो अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लोगों ने क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने और चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है।
क्या बोले थाना प्रभारी
दही थाना प्रभारी निरीक्षक ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर घटना का खुलासा किया जाएगा।
प्रशासन ने कसी कमर : गुरु पूर्णिमा मेले की तैयारियों का डीएम-एसएसपी ने लिया जायजा
Tue, Jul 28, 2026
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोशनी, पेयजल, शौचालय और बैरिकेडिंग पर विशेष जोर
उन्नाव। गुरु पूर्णिमा के मौके पर मां चंद्रिका देवी धाम और बक्सर घाट पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। मंगलवार दोपहर जिलाधिकारी घनश्याम मीना और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह ने बक्सर घाट पहुंचकर मेले की तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने घाट से लेकर मेला परिसर तक सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, शौचालय, महिलाओं के चेंजिंग रूम और यातायात प्रबंधन सहित सभी जरूरी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि गुरु पूर्णिमा पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करने और मां चंद्रिका देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी तैयारियां तय समय के भीतर पूरी कर ली जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने विशेष रूप से घाटों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए, ताकि देर शाम और रात के समय आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। उन्होंने महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चेंजिंग रूम समय से तैयार कराने और शौचालयों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही पूरे मेला परिसर और घाट क्षेत्र में सफाई व्यवस्था लगातार बनाए रखने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने गहरे पानी वाले स्थानों पर मजबूत बैरिकेडिंग लगाने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी श्रद्धालु खतरे वाले क्षेत्र में न जा सके। इसके अलावा पर्याप्त संख्या में नावों की उपलब्धता, प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती और आपात स्थिति में तुरंत संपर्क के लिए सभी संबंधित कर्मियों के मोबाइल नंबर उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए।उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व, नगर पंचायत और अन्य विभाग आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाएं, ताकि मेले का आयोजन सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह ने भी मेला क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भीड़ प्रबंधन, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए। एसएसपी ने कहा कि मेले में आने वाले हर श्रद्धालु की सुरक्षा पुलिस की पहली प्राथमिकता है और इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी बीघापुर, खंड विकास अधिकारी, संबंधित थाना प्रभारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि गुरु पूर्णिमा मेले से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित माहौल में गंगा स्नान कर सकें और मां चंद्रिका देवी के दर्शन कर सकें।
16 करोड़ का पुल 16 दिन भी नहीं चला : भाजपा सरकार पर बरसे प्रीतम सिंह
Tue, Jul 28, 2026
टोंस नदी पुल के अप्रोच रोड धंसने पर कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के लगाए आरोप
प्रीतम सिंह बोले, जनता के टैक्स के पैसे से हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल
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देहरादून। प्रेमनगर के नंदा की चौकी स्थित टोंस नदी पर बने पुनर्निर्मित पुल का अप्रोच रोड धंसने के बाद उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। करीब 16 करोड़ की लागत से तैयार इस पुल को हाल ही में आम लोगों के लिए खोला गया था, लेकिन पहली बड़ी बारिश के बाद ही अप्रोच रोड का हिस्सा धंस गया। घटना के बाद कांग्रेस ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक पुल का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल है। उनका कहना है कि जिस पुल पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वह कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त हो गया। इससे साफ है कि कहीं न कहीं निर्माण प्रक्रिया या गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर चूक हुई है। प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण पर करीब 16 करोड़ खर्च किए गए थे। मरम्मत पूरी होने के बाद 12 जुलाई को पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया, लेकिन महज 16 दिन बाद ही अप्रोच रोड धंस गया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी लागत के बावजूद निर्माण का इतनी जल्दी खराब होना आम लोगों के पैसे की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर उनकी गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि सरकारी विभागों में कथित कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के कारण निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार नहीं हो रहे हैं, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब भी किसी सरकारी परियोजना में खामियां सामने आती हैं, तब जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होती। यही वजह है कि लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती और ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि निर्माण कार्य की निगरानी किस अधिकारी ने की, गुणवत्ता परीक्षण किस स्तर पर हुआ और आखिर ऐसी क्या वजह रही कि करोड़ों रुपये की परियोजना पहली ही बारिश में जवाब दे गई। प्रीतम सिंह ने कहा कि जनता अपने टैक्स के पैसे से बनने वाले हर सरकारी निर्माण का हिसाब चाहती है। सरकार को यह बताना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार कौन है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। उनके अनुसार विकास कार्य तभी सार्थक माने जाएंगे, जब उनमें पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही तीनों सुनिश्चित हों।
बारिश में खुली निर्माण की परीक्षा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन अप्रोच रोड धंसने के बाद एक बार फिर सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी जांच नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा भी हो सकता है।
अब सबकी नजर सरकार की कार्रवाई पर
पुल के धंसने की घटना के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है, जबकि आम लोग भी यह जानना चाहते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य इतनी जल्दी कैसे प्रभावित हो गया। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करती है या यह मामला भी अन्य निर्माण विवादों की तरह फाइलों तक सीमित रह जाता है।