दो मिनट के वीडियो में जिंदगी का आखिरी सच बताया... : फिर फंदे पर झूल गया युवक
Mon, Jul 27, 2026
सुसाइड वीडियो में पत्नी और उसके रिश्तेदारों पर लगाए गंभीर आरोप
पिता ने चार लोगों के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की
उन्नाव। “मेरी मौत की जिम्मेदार मेरी पत्नी और उसकी बुआ का लड़का है... इन लोगों ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी।” रविवार को युवक ने यह बात अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड की। करीब दो मिनट के इस वीडियो में उसने अपनी मौत के लिए पत्नी समेत कुछ लोगों को जिम्मेदार बताया। वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद वह टीन शेड पर गया और नायलॉन की रस्सी से फंदा लगाकर जान दे दी। सोमवार को जब यह वीडियो सामने आया तो परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने वीडियो देखा तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मामला सदर कोतवाली क्षेत्र का है।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार में कोहराम
मृतक पवन राठौर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पिता सुनील ने पुलिस को दी तहरीर में बेटे को लगातार मानसिक रूप से परेशान किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि घरेलू विवाद और मानसिक उत्पीड़न के चलते पवन इस कदर टूट गया कि उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। पिता ने तहरीर में पवन की पत्नी रागिनी राठौर, उसके कथित प्रेमी सूरज राठौर, ससुराल पक्ष के रवि राठौर और पत्नी की बहन सोनी को बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि इन लोगों की प्रताड़ना से पवन लंबे समय से परेशान था।
वीडियो में लगाए आरोप, पुलिस जांच में जुटी
पवन की मौत से पहले बनाया गया वीडियो अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गया है। परिवार का कहना है कि वीडियो में पवन ने अपनी मौत के लिए पत्नी और उसकी बुआ के बेटे को जिम्मेदार बताया है। परिजनों ने पुलिस से वायरल वीडियो, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर आरोपितों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। परिवार की तहरीर के आधार पर पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस वीडियो की सत्यता, उसमें कही गई बातों और युवक की मौत से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच करेगी। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वीडियो से खुलेगा मौत का राज
मगरवारा चौकी प्रभारी रविशंकर पांडेय ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। परिजनों से तहरीर प्राप्त हुई है। जांच के बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वायरल वीडियो, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ ही परिजनों के बयानों को जांच में शामिल किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर निष्पक्ष और विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अधिवक्ताओं को सम्मान : न्याय व्यवस्था में योगदान को सराहा
Mon, Jul 27, 2026
श्वेता मिश्रा और भानु मिश्रा के आयोजन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने की शिरकत
उन्नाव। अधिवक्ताओं के सम्मान में नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा और उनके पति भानु मिश्रा की ओर से सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। समारोह में उन्नाव बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरीश मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ बड़ी संख्या में बार एसोसिएशन के सदस्य शामिल हुए। आयोजकों ने सभी अधिवक्ताओं का सम्मान कर उनके प्रति सम्मान और आभार जताया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ता समाज लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आम लोगों की समस्याओं को कानूनी तरीके से न्यायालय तक पहुंचाने और उन्हें न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं का योगदान अहम है। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ता केवल न्यायालय में पैरवी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में कानून और अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुभव और नए अधिवक्ताओं की ऊर्जा न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक है। इस मौके पर आयोजकों ने अधिवक्ताओं का सम्मान किया। अधिवक्ता समाज के लोगों ने सम्मान समारोह आयोजित करने के लिए श्वेता मिश्रा और भानु मिश्रा का आभार जताया। कार्यक्रम में अधिवक्ता समाज के वरिष्ठ सदस्य, गणमान्य लोग और अन्य लोग मौजूद रहे।
सपा ने उठाई आवाज : जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर कार्रवाई रोकने की मांग
Mon, Jul 27, 2026
सपा अल्पसंख्यक सभा जिलाध्यक्ष नियाज खान ने राज्यपाल को भेजा ज्ञापन, बोले- छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला
उन्नाव। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी ने विरोध जताया है। सोमवार को सपा अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष नियाज खान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन डीएम के माध्यम से भेजा। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह मामला केवल भवनों को गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा। नियाज खान ने कहा कि विश्वविद्यालय में यदि किसी भवन के नक्शे या भूमि से संबंधित कोई विवाद है तो उसका समाधान कानून के तहत किया जाना चाहिए। किसी भी कार्रवाई से पहले यह भी देखा जाना जरूरी है कि उसका असर शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य पर क्या पड़ेगा।
निर्माण के समय अनुमति की जरूरत नहीं थी
ज्ञापन में सपा नेता ने दावा किया कि विश्वविद्यालय का निर्माण जिस समय हुआ, उस समय ग्राम सींगनखेड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र में आता था। ऐसे में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत इस निर्माण के लिए अनुमति लेना आवश्यक नहीं था। उनका यह भी कहना है कि निर्माण के समय गांव रामपुर विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में भी शामिल नहीं था। नियाज खान के अनुसार, ग्राम सींगनखेड़ा को 27 सितंबर 2024 को रामपुर विकास प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल किया गया। उनका कहना है कि उस समय तक विश्वविद्यालय का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका था। ऐसे में बाद में विकास प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल किए जाने के आधार पर पुराने निर्माणों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है।
‘राजनीतिक द्वेष से की जा रही कार्रवाई’
सपा अल्पसंख्यक सभा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल राजनीतिक द्वेष के चलते विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था और यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भवनों को गिराने की कार्रवाई से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। इसलिए सरकार और प्रशासन को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर विद्यार्थियों के हित में फैसला लेना चाहिए। नियाज खान ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए 38 भवनों को ध्वस्त करने की प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का निस्तारण संविधान, कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार होना चाहिए, ताकि छात्रों की शिक्षा और उनके भविष्य पर संकट न आए।