मांगों को लेकर पालिका में धरने पर बैठे सभासद : जल्द निस्तारण का मिला आश्वासन
Mon, Aug 3, 2026
पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि और ईओ से वार्ता के बाद बनी सहमति
उन्नाव। नगर पालिका परिषद परिसर में सोमवार को विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर कई सभासद धरने पर बैठ गए। सभासद सतीश यादव, राजेंद्र भारतीय, रवि, यासीन अहमद शिबू, अमित सिंह बऊआ, मोहम्मद आरिफ सानू, सुशील तिवारी, दिनेश लोधी और पंकज लोधी के नेतृत्व में हुए धरने में नगर के विकास कार्य, पेयजल व्यवस्था, सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़े नौ प्रमुख मुद्दे उठाए गए। धरने की सूचना मिलते ही पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि प्रवीण मिश्रा 'भानु' और अधिशाषी अधिकारी (ईओ) राम आसरे कमल मौके पर पहुंचे। दोनों ने सभासदों के साथ वार्ता कर उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। वार्ता के दौरान कुछ मांगों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष बिंदुओं पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके बाद सभासदों ने शांतिपूर्वक धरना समाप्त कर दिया। सभासदों ने कहा कि नगर पालिका के ऐसे मकानों से वाटर टैक्स लिया जा रहा है, जहां आज तक पालिका की ओर से पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। उन्होंने मांग की कि जिन घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, उनका वाटर टैक्स तत्काल प्रभाव से माफ किया जाए। धरने में आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। सभासदों का कहना था कि कर्मचारियों को वर्ष 2026 के शासनादेश के अनुसार वेतन मिलना चाहिए, जबकि वर्तमान में उन्हें वर्ष 2024 के शासनादेश के अनुसार भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने शासनादेश के अनुरूप वेतन दिए जाने की मांग की। इसके अलावा सभासदों ने उनके शिकायती पत्रों का निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारण करने, पड़ाव अड्डों की नीलामी प्रत्येक वर्ष पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कराने तथा शहर में जलभराव की समस्या को देखते हुए नाला सफाई का कार्य भी टेंडर प्रक्रिया से कराए जाने की मांग रखी। सभासदों ने सभी वार्डों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से विकास कार्य कराए जाने, बोर्ड बैठक की कार्यवाही (प्रोसीडिंग बुक) की छायाप्रति सभी सभासदों को उपलब्ध कराने तथा उनके प्रस्तावों को विकास कार्यों की योजनाओं में शामिल करने की भी मांग की। धरने के दौरान सभासदों ने यह मुद्दा भी उठाया कि पूर्व में भ्रष्टाचार से जुड़े पांच बिंदुओं की जांच में अधिशाषी अधिकारी को दोषी पाए जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने इस प्रकरण में शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट पर प्रभावी निर्णय लिया जाना चाहिए।बातचीत के दौरान पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि प्रवीण मिश्रा 'भानु' और अधिशाषी अधिकारी राम आसरे कमल ने सभासदों को भरोसा दिलाया कि जिन मांगों का तत्काल समाधान संभव है, उनका निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और अन्य मामलों को भी नियमानुसार शीघ्र पूरा कराया जाएगा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद सभासदों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
पूर्व एलआईयू दारोगा ने खुद को मारी गोली : कानपुर ले जाते समय मौत
Mon, Aug 3, 2026
गोली की आवाज सुनकर कमरे में पहुंचे बेटे ने देखा खून से लथपथ पड़े थे पिता, पुलिस ने शुरू की जांच
उन्नाव। शहर के पीडी नगर मोहल्ले में रविवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस की एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) शाखा से रिटायर्ड दारोगा ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से खुद को गोली मार ली। गंभीर रूप से घायल हालत में परिजन उन्हें इलाज के लिए कानपुर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई और जांच शुरू कर दी। मूल रूप से कन्नौज जिले के गुरसहायगंज क्षेत्र के रउतामई गांव निवासी 65 वर्षीय रामजीत वर्ष 2021 में एलआईयू शाखा से सेवानिवृत्त हुए थे। वह काफी समय से अपने बेटे अभिषेक के साथ उन्नाव के पीडी नगर मोहल्ले में रह रहे थे। आसपास के लोगों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले पत्नी के निधन के बाद से वह अक्सर मानसिक तनाव में रहते थे। बेटे अभिषेक ने पुलिस को बताया कि रविवार रात करीब 10 बजे पिता ने परिवार के साथ खाना खाया और अपने कमरे में सोने चले गए। करीब डेढ़ घंटे बाद अचानक गोली चलने की तेज आवाज सुनाई दी। वह दौड़कर कमरे में पहुंचे तो पिता खून से लथपथ पड़े थे। तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां से कानपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई।पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से रामजीत की लाइसेंसी एकनाली बंदूक बरामद हुई है, जिसे कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। शुरुआती जानकारी में बेटे ने पुलिस को बताया है कि पिता डिप्रेशन में थे और इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया। घटना की जानकारी मिलते ही सीओ सिटी विनी सिंह और शहर कोतवाल चंद्रकांत मिश्र मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर परिवार के लोगों से पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि अभी प्रथम दृष्टया से मामला आत्महत्या का नजर आ रहा है, लेकिन हर पहलू को लेकर भी जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने लौटाई 121 लोगों की मुस्कान : 25 लाख के गुम मोबाइल मालिकों तक पहुंचे
Sun, Aug 2, 2026
जनवरी से अब तक 1.01 करोड़ रुपये के 488 मोबाइल बरामद
उन्नाव। मोबाइल गुम होने के बाद ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि अब वह कभी वापस नहीं मिलेगा। लेकिन उन्नाव पुलिस ने एक बार फिर इस धारणा को गलत साबित कर दिया। जनपद पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत 121 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को वापस सौंप दिए। बरामद मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 25 लाख रुपये है। लंबे समय बाद अपना मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी और उन्होंने पुलिस टीम का आभार जताया। रविवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह ने मोबाइल स्वामियों को उनके फोन सौंपे। इस दौरान उन्होंने बताया कि मोबाइल पहचान पंजीकरण प्रणाली (सीईआईआर) के प्रभावी उपयोग और सर्विलांस टीम की तकनीकी निगरानी से गुम मोबाइलों की बरामदगी में लगातार सफलता मिल रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर जनपद के सभी थानों में मोबाइल गुम होने की शिकायतों को मोबाइल पहचान पंजीकरण प्रणाली (सीईआईआर) पर दर्ज कराया जा रहा है। इसके बाद सर्विलांस टीम मोबाइल की लोकेशन ट्रेस कर संबंधित थानों के सहयोग से उन्हें बरामद करती है। एसएसपी ने बताया कि अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी अखिलेश सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी शैलेन्द्र लाल के पर्यवेक्षण में सर्विलांस सेल और सभी थाना पुलिस की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक 488 मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपये है, बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए जा चुके हैं। इनमें केवल 2 अगस्त को ही 121 मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, इस बार बरामद मोबाइलों में सैमसंग (10), वीवो (33), ओप्पो (15), रियलमी (17), रेडमी (17), टेक्नो (10), वनप्लस (6), पोको (4), लावा (2), मोटोरोला (2), आईटेल (2), इनफिनिक्स (2), आईक्यूओ (1) और एचएमडी (1) कंपनी के स्मार्टफोन शामिल हैं। मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका खोया हुआ फोन दोबारा मिल पाएगा, लेकिन उन्नाव पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच के चलते उनका कीमती सामान वापस मिल गया।एसएसपी जय प्रकाश सिंह ने लोगों से अपील की कि मोबाइल गुम होने या चोरी होने पर तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दें और मोबाइल पहचान पंजीकरण प्रणाली (सीईआईआर) पर भी शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत दर्ज होने से मोबाइल बरामद होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और सर्विलांस की मदद से जनपद पुलिस अपराध नियंत्रण के साथ-साथ आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए भी लगातार काम कर रही है। आने वाले समय में भी गुम मोबाइलों की बरामदगी का अभियान इसी तरह जारी रहेगा।