जिला जेल के बाहर परिजनों का हंगामा : वाराणसी में इलाज के दौरान बंदी की मौत
Wed, Jun 3, 2026
दुष्कर्म के प्रयास और छेड़छाड़ के मामले में जेल में था निरुद्ध, तबीयत बिगड़ने पर वार्ड में ले जाया गया था
उन्नाव। जिला जेल में निरुद्ध बंदी की वाराणसी स्थित मानसिक चिकित्सालय में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत की सूचना मिलने पर बुधवार को परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में जिला जेल पहुंच गए और हंगामा किया। उन्होंने जेल प्रशासन पर समय पर जानकारी न देने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। सूचना पर पहुंचे अधिकारियों ने समझाकर लोगों को शांत कराया। गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के निहाल खेड़ा निवासी राहुल निषाद पुत्र विमल निषाद छेड़छाड़ और दुष्कर्म के प्रयास के मामले में वर्ष 2025 से जिला जेल में निरुद्ध था। जेल में उसकी मानसिक स्थिति ठीक न होने पर अदालत के आदेश से 24 मार्च 2026 को उसे वाराणसी के मानसिक चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। वहां उसका इलाज चल रहा था। बताया गया कि मंगलवार रात राहुल ने भोजन करने के बाद नियमित दवाएं लीं और बैरक में आराम करने चला गया। देर रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और सीने में दर्द की शिकायत होने पर उसे तत्काल उपचार के लिए वार्ड में ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे दीनदयाल अस्पताल भेजा, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। मौत की सूचना मिलने के बाद बुधवार दोपहर राहुल के परिजन और ग्रामीण जिला जेल पहुंच गए। उन्होंने जेल प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप था कि राहुल की तबीयत और इलाज की स्थिति के बारे में उन्हें समय पर जानकारी नहीं दी गई। मृतक की मां ने इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जिला जेल पहुंच गए। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई। एहतियात के तौर पर जिला जेल परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। जेल अधीक्षक नीरज देव ने बताया कि राहुल निषाद को न्यायालय के आदेश पर मानसिक उपचार के लिए वाराणसी भेजा गया था। वहीं इलाज के दौरान उसकी मौत हुई है। मामले में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नाली विवाद में युवक से मारपीट का आरोप : गर्भवती पत्नी का गर्भपात होने का दावा
Wed, Jun 3, 2026
बीघापुर के नया खेड़ा गांव का मामला, पीड़ित ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का लगाया आरोप
उन्नाव। बीघापुर थाना क्षेत्र के नया खेड़ा गांव में नाली के पानी की निकासी को लेकर हुए विवाद में युवक ने पड़ोसियों पर मारपीट और गला घोंटने के प्रयास का आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि बीच-बचाव करने पहुंची उसकी गर्भवती पत्नी के साथ भी मारपीट की गई, जिससे बाद में उसका गर्भपात हो गया। हालांकि गर्भपात की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। गांव निवासी सुनील कुमार ने बताया कि पड़ोसी अपने घर का पानी उस दिशा में निकालना चाहते थे, जहां पहले कभी पानी नहीं बहता था। इसका विरोध करने पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि पड़ोस के कई लोगों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। सुनील का कहना है कि हमलावरों ने उनके गले में पड़ा अंगौछा कस दिया, जिससे उनका दम घुटने लगा। सुनील के मुताबिक, शोर सुनकर उनकी पत्नी उन्हें बचाने पहुंचीं तो आरोपियों ने उनके साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी तीन माह की गर्भवती थीं। घटना के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और देर रात गर्भपात हो गया।पीड़ित ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्होंने गांव के प्रधान से शिकायत की। प्रधान के कहने पर पुलिस चौकी और बाद में बीघापुर थाने में तहरीर दी। महिला डेस्क पर भी प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उधर, बीघापुर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि मामला दो पक्षों के बीच विवाद का है। शिकायत मिली है और प्रकरण की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नगर पालिका अध्यक्ष पर शासन की सख्ती : जांच में कई आरोप सही पाए गए
Wed, Jun 3, 2026
प्रमुख सचिव ने जारी किया कारण बताओ नोटिस, 15 दिन में मांगा जवाब
17 आरोपों की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई
उन्नाव। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष के खिलाफ की गई शिकायतों पर हुई जांच के बाद शासन ने सख्त रुख अपनाया है। जांच समिति की रिपोर्ट में कई आरोप सही पाए जाने के बाद नगर विकास विभाग ने अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रमुख सचिव नगर विकास गुरु प्रसाद की ओर से जारी नोटिस में 15 दिन के भीतर साक्ष्यों सहित जवाब देने को कहा गया है। स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब न मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद में पूर्व में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों, वित्तीय निर्णयों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर शिकायतें की गई थीं। इन शिकायतों की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। समिति ने विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। जांच रिपोर्ट के अनुसार अध्यक्ष के खिलाफ लगाए गए कुल 17 आरोपों में से चार आरोप पूरी तरह सही पाए गए हैं। इसके अलावा एक आरोप आंशिक रूप से सिद्ध हुआ है, जबकि दो मामलों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद शासन स्तर पर पूरे प्रकरण का परीक्षण किया गया और उसके बाद नोटिस जारी करने का फैसला लिया गया। जांच के दौरान पड़ाव अड्डा संचालन और उससे संबंधित प्रशासनिक निर्णयों पर भी सवाल खड़े हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अड्डा संचालन से जुड़े कार्यों के लिए नियमित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। निर्धारित प्रक्रिया के तहत नई निविदा आमंत्रित करने के बजाय पहले से कार्य कर रही फर्मों को कार्य अवधि का विस्तार दे दिया गया। जांच समिति ने इसे प्रक्रिया संबंधी गंभीर त्रुटि माना है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ फर्मों को प्रतिबंधित करने की कार्रवाई में भी तय नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। समिति ने इस संबंध में कई बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की हैं। इन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर शासन ने अध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है। शासन के नोटिस के बाद नगर पालिका की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की निगाहें अब अध्यक्ष के जवाब पर टिकी हैं। अगर जवाब से शासन संतुष्ट नहीं होता है तो आगे की वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा नियमों के तहत कार्य किया है और किसी भी स्तर की जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें शासन की ओर से जो भी नोटिस प्राप्त होगा, उसका तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित जवाब दिया जाएगा। अब पूरे मामले में निगाहें शासन के अगले कदम पर हैं। अध्यक्ष का जवाब मिलने के बाद नगर विकास विभाग रिपोर्ट और स्पष्टीकरण का परीक्षण करेगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।