ऑनलाइन गेमिंग में मुनाफे का झांसा : युवक से 5.55 लाख की साइबर ठगी
Tue, Sep 22, 2026
व्हाट्सएप पर कार्तिकेय बुक नाम से आया था संदेश, अलग-अलग खातों से गेमिंग में लगाता रहा रकम
उन्नाव। व्हाट्सएप पर आए एक मैसेज के बाद ऑनलाइन गेमिंग शुरू करना माखी के युवक को भारी पड़ गया। गेम में रकम लगाने के दौरान उसे शायद अंदाजा नहीं था कि वह साइबर ठगी के जाल में फंस चुका है। अपने खाते के साथ दोस्त के बैंक खाते से भी रकम लगाने के बाद जब पैसा वापस नहीं मिला तो उसे ठगी का पता चला। युवक ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। माखी के रहने वाले राजन सिंह के मोबाइल पर 16 जुलाई को व्हाट्सएप मैसेज आया था। मैसेज कार्तिकेय बुक नाम से भेजा गया था। इसके बाद ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा संपर्क बढ़ा और राजन ने गेम में रुपये लगाना शुरू कर दिया।
किस्तों में लगाता रहा रकम
राजन के अनुसार छह जुलाई से 10 अगस्त के बीच उसके बैंक खाते से कुल 4,38,665 रुपये ऑनलाइन गेमिंग में लगाए गए। रकम एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग लेनदेन के जरिये भेजी गई। इसके बाद भी गेमिंग में रकम लगाने का सिलसिला जारी रहा। राजन ने अपने दोस्त के बैंक खाते का भी इस्तेमाल किया। उसके दोस्त के खाते से 1,16,500 रुपये लगाए गए। दोनों खातों से मिलाकर करीब 5,55,165 रुपये गेमिंग में चले गए।
पैसा वापस नहीं आया तो खुला ठगी का राज
काफी रकम लगाने के बाद जब राजन को अपेक्षित भुगतान नहीं मिला तो उसे शक हुआ। जांच-पड़ताल करने पर उसे अपने साथ धोखाधड़ी होने का पता चला। इसके बाद उसने साइबर क्राइम थाने में पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी। राजन ने पुलिस को दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर उससे रकम ली गई है। उसने पुलिस से साइबर ठगी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और उसकी रकम वापस दिलाने की मांग की।
खातों और नंबर की जांच में जुटी पुलिस
मामले में 21 सितंबर को साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस अब व्हाट्सएप पर संपर्क करने वाले नंबर, जिन बैंक खातों में रकम गई और लेनदेन के दौरान इस्तेमाल हुए अन्य विवरणों की जांच कर रही है। साइबर ठगों तक पहुंचने के लिए बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
भरोसे से शुरू हुआ विवाद : मृतक आश्रित की रकम और संपत्ति हड़पने का आरोप, पांच पर रिपोर्ट
Tue, Sep 22, 2026
मकान और पिता की रकम को लेकर सौतेले भाई समेत पांच लोगों पर आरोप
उन्नाव। पिता की मौत के बाद शुरू हुआ परिवार के बीच संपत्ति और रुपये का विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। एबी नगर निवासी 26 वर्षीय दीपशिखा ने अपने सौतेले भाई, उसकी पत्नी, सौतेली बहन और दो अन्य लोगों पर धोखाधड़ी से रुपये व संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि जब उसने और उसकी बहन ने अपने हिस्से की संपत्ति और रकम के बारे में सवाल उठाए तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली सदर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। दीपशिखा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसके पिता कृष्णपाल सिंह मैनहा स्थित पटेल जनहित महाविद्यालय में सहायक अध्यापक थे। परिवार में उनकी दो शादियां हुई थीं। पहली पत्नी से प्रदीप कुमार उर्फ दीपक, शालिनी, शिखा और अनुराधा तथा दूसरी पत्नी गायत्री देवी से दीपशिखा और नेहा हैं। कृष्णपाल सिंह की 16 फरवरी 2009 को सेवाकाल के दौरान मौत हो गई थी।
दोनों बहनें उस समय थीं नाबालिग
दीपशिखा का कहना है कि माता-पिता की मौत के बाद वह और उसकी बहन नेहा कम उम्र की थीं। इसी दौरान सौतेले भाई प्रदीप कुमार उर्फ दीपक, उसकी पत्नी अर्चना देवी, अनुराधा देवी और अरविंद कटियार उर्फ गुड्डू ने दोनों को भरोसे में लिया। आरोप है कि पिता के पीएफ, एफडी, आरडी और दूसरी रकम के साथ दोनों माताओं के जेवर भी आरोपियों ने अपने पास रख लिए।शिकायत के मुताबिक उस समय दोनों बहनों से कहा गया था कि पिता की रकम लेने के बदले एबी नगर स्थित मकान उनके नाम कर दिया जाएगा। आरोप है कि इसी भरोसे पर रकम आरोपियों के कब्जे में चली गई, लेकिन बाद में मकान का बैनामा दोनों बहनों के नाम नहीं किया गया।
बैंक खाते से रकम निकालने का भी आरोप
दीपशिखा ने आरोप लगाया कि उसकी बहन के इंडियन बैंक के खाते में जमा मृतक आश्रित की रकम में भी प्रदीप कुमार ने अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा लिया। इसके बाद खाते से रकम निकाल ली गई। इतना ही नहीं, ग्राम पहाड़पुर सुबस में पिता के नाम रही भूमि में भी कथित तौर पर प्रदीप कुमार ने खुद को अकेला वारिस बताते हुए नाम दर्ज करा लिया। मामले की जानकारी होने के बाद दीपशिखा और उसकी बहन ने भूमि में अपना हक लेने के लिए तहसीलदार न्यायालय में वाद दायर किया। इसके बाद परिवार के बीच विवाद और बढ़ गया।
मकान छोड़ने को कहा, विरोध पर धमकी का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि जब उसने और उसकी बहन ने एबी नगर स्थित मकान में अपने हिस्से की बात की तो आरोपियों ने साफ कह दिया कि पिता की रकम और नौकरी से जुड़ा लाभ वे ले चुके हैं। मकान छोड़ने के लिए दबाव बनाया गया। शिकायत करने पर दोनों बहनों को जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है। विवाद के बीच वर्ष 2021 में दोनों बहनों के खिलाफ मकान से बेदखली का दीवानी मुकदमा भी दायर किया गया। यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
परिवार रजिस्टर को लेकर भी शिकायत
दीपशिखा ने प्रदीप कुमार और अनुराधा देवी पर परिवार रजिस्टर की कथित कूटरचित नकल तैयार कराने और उसका सरकारी काम में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उसने पुलिस को दिए प्रार्थनापत्र में यह भी कहा है कि दस्तावेजों में पारिवारिक संबंधों को लेकर गलत जानकारी दर्ज कराई गई।पीड़िता के अनुसार 19 फरवरी 2026 को एक शादी समारोह के दौरान भी आरोपियों ने उसे और उसकी बहन को धमकाया। इसके बाद उसने कोतवाली में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 23 फरवरी को एसपी को भी प्रार्थनापत्र दिया गया। वहां से भी राहत नहीं मिलने पर उसने न्यायालय की शरण ली।न्यायालय के आदेश पर कोतवाली सदर पुलिस ने प्रदीप कुमार उर्फ दीपक, अर्चना देवी, अनुराधा देवी, शशिशंकर और अरविंद कटियार उर्फ गुड्डू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस मामले में लगाए गए आरोपों, बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों और परिवार रजिस्टर समेत अन्य अभिलेखों की जांच कर रही है। पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
साइबर ठगी : खाते से रकम निकलती रही, भनक तक नहीं लगी
Tue, Sep 22, 2026
एक-दो नहीं, सात दिन में खाते से निकल गए 6.75 लाख रुपये; साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज
उन्नाव। मोबाइल से पेमेंट करते समय एक व्यक्ति को अचानक पता चला कि उसके बैंक खाते में रकम ही नहीं बची है। उसने फोनपे की हिस्ट्री खंगाली तो सामने आया कि उसके खाते से पिछले कई दिनों में लाखों रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं। पीड़ित के मुताबिक, उसे इन ट्रांजेक्शन की कोई जानकारी नहीं थी। जांच में सामने आए लेनदेन के आधार पर उसने साइबर थाने में शिकायत की। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। बारासगवर क्षेत्र के नारायण दास खेड़ा गांव निवासी श्रीराम के साथ यह मामला सामने आया है। उन्होंने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि सात सितंबर को वह मोटरसाइकिल बनवाने गए थे। काम पूरा होने के बाद मिस्त्री को फोनपे से रुपये भेजने की कोशिश की, लेकिन भुगतान नहीं हो सका। उन्हें लगा कि शायद फोनपे में कोई तकनीकी दिक्कत है। इसी दौरान उन्होंने अपने फोन में पेमेंट हिस्ट्री चेक की।
हिस्ट्री देखी तो उड़ गए होश
फोनपे की हिस्ट्री देखने पर उन्हें खाते से हुए ऐसे लेनदेन की जानकारी मिली, जो उन्होंने किए ही नहीं थे। इसके बाद बैंक खाते का विवरण खंगाला तो पता चला कि एक सितंबर से सात सितंबर के बीच खाते से कुल 6,75,887 रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। रकम कई ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से बाहर गई। पीड़ित का कहना है कि उसे इस दौरान किसी भी रकम के निकाले जाने की जानकारी नहीं हुई। श्रीराम का खाता पंजाब नेशनल बैंक की विकास भवन अयोध्या शाखा से जुड़ा बताया गया है। खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने साइबर थाने पहुंचकर अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
बिना जानकारी ट्रांसफर हुई रकम, जांच में जुटी पुलिस
पीड़ित ने आशंका जताई है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने साइबर धोखाधड़ी कर उसके बैंक खाते से रकम ट्रांसफर की है। पुलिस ने 21 सितंबर को तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब बैंक खाते से हुए ट्रांजेक्शन, रकम जिन खातों में गई और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। पीड़ित ने पुलिस से ठगी गई रकम वापस कराने की भी मांग की है। शिकायत के साथ पीड़ित ने आधार कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और पासबुक की प्रतियां भी पुलिस को उपलब्ध कराई हैं। जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि रकम किस तरीके से खाते से निकाली गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।