हरियाली की जगह विज्ञापन पोल : डिवाइडर खोदकर खड़े किए होर्डिंग पोल
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Fri, Sep 18, 2026
31 तीन तरफा होर्डिंग और 13 यूनीपोल से पटी जिला अस्पताल रोड, हादसे का भी खतरा

उन्नाव। शहर में विज्ञापन कारोबार का खेल अब सड़क के बीच बने डिवाइडर तक पहुंच गया है। जिला अस्पताल रोड पर डिवाइडर में लगे पौधों के बीच होर्डिंग के लिए लोहे के पोल खड़े कर दिए गए हैं। कहीं पौधों की जगह पोल नजर आ रहे हैं तो कहीं डिवाइडर खोदकर नए ढांचे खड़े किए जा रहे हैं। करीब 31 तीन तरफा होर्डिंग पोल और 13 यूनीपोल लगाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कई जगह इन पोल को रात के अंधेरे में लगाया गया। जिस डिवाइडर को हरियाली और सड़क की खूबसूरती के लिए तैयार किया गया था, अब वही विज्ञापन कारोबारियों के लिए कमाई का जरिया बनता दिखाई दे रहा है।आईबीपी चौराहा पर भी इसी तरह विज्ञापन स्ट्रक्चर नजर आ रहे हैं। पोल लगाने के लिए डिवाइडर में गड्ढे किए जा रहे हैं। इससे पौधों को नुकसान पहुंचने के साथ डिवाइडर भी क्षतिग्रस्त हो रहा है। सड़क के बीच इतनी संख्या में होर्डिंग स्ट्रक्चर खड़े होने से यातायात सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हो गया है।
60 लाख के काम पर होर्डिंग का कब्जा
जिला अस्पताल से गदनखेड़ा चौराहे तक फुटपाथ और डिवाइडर का निर्माण आवास विकास परिषद ने करीब 60 लाख रुपये की लागत से कराया था। करीब 54 लाख रुपये से स्ट्रीट लाइटें भी लगाई गई थीं। डिवाइडर के बीच पौधे लगाए गए थे। मकसद था कि सड़क व्यवस्थित और सुंदर नजर आए। लेकिन अब इसी जगह पर एक के बाद एक विज्ञापन पोल खड़े किए जा रहे हैं।
पौधे हटे, गड्ढे हुए और पोल खड़े हो गए
होर्डिंग लगाने के लिए डिवाइडर में जगह-जगह खुदाई की गई है। कई स्थानों पर पौधों के आसपास लोहे के पोल दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि निजी विज्ञापन लगाने के लिए सार्वजनिक निर्माण वाले डिवाइडर में खुदाई करने की अनुमति किसने दी? अगर अनुमति ली गई है तो उसकी शर्तें क्या हैं और कितने पोल लगाने की मंजूरी है?
टैक्स जमा हो रहा या सिर्फ विज्ञापन लग रहे?
सूत्रों के अनुसार कुछ होर्डिंग कारोबारी निर्धारित टैक्स या शुल्क जमा किए बिना विज्ञापन पोल लगाए जाने की बात कही जा रही है। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में जिला अस्पताल रोड पर लगे सभी होर्डिंग और यूनीपोल का रिकॉर्ड खंगालना जरूरी है। किस कारोबारी ने कितने पोल लगाए, किस स्थान की अनुमति मिली, कितना शुल्क जमा हुआ और मौके पर अनुमति के मुताबिक ही स्ट्रक्चर लगाए गए या नहीं, इन सभी बिंदुओं की जांच से तस्वीर साफ होगी।
आंधी आई तो भारी पोल बन सकते हैं खतरा
डिवाइडर के बीच खड़े किए गए भारी-भरकम होर्डिंग और यूनीपोल सिर्फ हरियाली ही नहीं, सड़क सुरक्षा से भी जुड़े हैं। तेज हवा या आंधी में कमजोर आधार वाले पोल उखड़कर सड़क पर गिरे तो वाहन सवार और राहगीर इसकी चपेट में आ सकते हैं। बड़े होर्डिंग से सड़क की दृश्यता प्रभावित होने या वाहन चालकों का ध्यान भटकने की स्थिति में भी दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए लगाए गए प्रत्येक स्ट्रक्चर की मजबूती और उसकी नींव की जांच भी जरूरी है।

रात में काम, सुबह दिखता नया पोल
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ स्थानों पर होर्डिंग पोल लगाने का काम रात के समय किया जा रहा है। दिन में सड़क से गुजरने वालों को डिवाइडर पर पहले से अधिक पोल नजर आते हैं। अगर यह बात सही है तो सवाल यह भी है कि रात में डिवाइडर की खुदाई और पोल लगाने का काम किसकी अनुमति से किया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में स्ट्रक्चर लगने के बावजूद उनके दस्तावेज और अनुमति की स्थिति भी सामने आनी चाहिए।
सरकारी डिवाइडर, निजी विज्ञापन का ठिकाना
करीब 60 लाख रुपये से तैयार डिवाइडर और 54 लाख रुपये की स्ट्रीट लाइटों पर सार्वजनिक धन खर्च हुआ है। इसके बीच लगाए गए पौधे भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं। ऐसे में निजी विज्ञापन कारोबार के लिए डिवाइडर में खुदाई और स्थायी पोल खड़े करने को लेकर नियमों की स्थिति साफ होना जरूरी है। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन लगाने के लिए स्थानीय निकाय की अनुमति और निर्धारित शुल्क की व्यवस्था है। जिला अस्पताल रोड पर लगे स्ट्रक्चर इसी प्रक्रिया के तहत लगे हैं या नहीं, जांच में यह स्पष्ट होना है।
पालिका अध्यक्ष बोलीं, जांच कराएंगे
नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में पोल लगाने वालों की अनुमति, टैक्स और डिवाइडर में की गई खुदाई समेत अन्य बिंदुओं की स्थिति स्पष्ट होगी।
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